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Up Kiran, Digital Desk: आयुर्वेद के ग्रंथों में घी को सदियों से अमृत कहा गया है। योगगुरु बाबा रामदेव भी इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि अगर सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शुद्ध देसी घी मिलाकर पिया जाए तो शरीर भीतर से मज़बूत होता है। यह न केवल पाचन शक्ति को सुधारता है, बल्कि शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने, त्वचा की चमक बढ़ाने और दिमाग को चुस्त रखने में भी मदद करता है।
क्यों है देसी घी इतना खास?
देसी घी को गुड फैट का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें विटामिन ए, डी, ई और के के साथ ज़रूरी फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। घी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन कम करते हैं और इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाते हैं। बाबा रामदेव के मुताबिक, नियमित रूप से शुद्ध घी का सेवन करने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
सुबह घी और गुनगुना पानी पीने के फायदे
दिमागी बीमारियों से सुरक्षा
घी मेमोरी पावर बढ़ाता है और सोचने-समझने की क्षमता को मज़बूत करता है। आयुर्वेदिक मान्यता है कि यह अल्जाइमर, डिमेंशिया और पार्किन्सन जैसे रोगों से बचाव में मददगार है।
आंखों की देखभाल
जिन लोगों को ड्राई आइज, जलन, खुजली या संक्रमण जैसी समस्या रहती है, उनके लिए भी देसी घी फायदेमंद है। यह आंखों को भीतर से पोषण देता है।
त्वचा में निखार
रूखी और बेजान त्वचा वाले लोग यदि पानी में घी मिलाकर इसका सेवन करें, तो उनकी स्किन में नमी और ग्लो दोनों ही नज़र आने लगते हैं।
मांसपेशियों और हड्डियों को ताकत
शारीरिक रूप से कमज़ोर लोग अगर घी को डाइट में शामिल करें तो उन्हें मसल्स और हड्डियों में मज़बूती मिलती है। यह जोड़ों के दर्द को भी कम करता है।
बेहतर इम्यूनिटी
देसी घी को इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है। नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।
घी खाने का सही तरीका
अधिकतर लोग घी को रोटी पर लगाकर खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे सही तरीका नहीं मानते। इस तरह घी जल्दी पचता नहीं और अपच या गैस की समस्या हो सकती है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में घी मिलाकर पीना सबसे असरदार माना जाता है। इससे मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है और शरीर को दिन की शुरुआत के लिए सही एनर्जी मिलती है।
किन्हें बरतनी चाहिए सावधानी
हालांकि घी सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन डायबिटीज, मोटापे और लिवर संबंधी मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। साथ ही, रोज़ाना एक से दो चम्मच से अधिक सेवन करने से बचना चाहिए।
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