Up Kiran, Digital Desk: मेघालय के प्रसिद्ध हिल स्टेशन सोहरा में हुए राजा रघुवंशी हत्याकांड ने न सिर्फ एक परिवार को तबाह किया, बल्कि राज्य के पर्यटन और सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। हनीमून ट्रिप के दौरान हुई इस साजिशनुमा हत्या की 790 पन्नों की चार्जशीट अब सामने आ चुकी है, जिसमें इस दर्दनाक घटना की परतें खुलती नजर आती हैं।
प्यार, धोखा और हत्या की प्लानिंग
इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी ने 11 मई को सोनम से शादी की थी। लेकिन यह रिश्ता जल्द ही एक खूनी मोड़ ले लेगा, किसी ने सोचा नहीं था। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोनम शादी के बाद भी अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा के संपर्क में थी। दोनों ने मिलकर राजा को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा। यह योजना हनीमून ट्रिप पर ही पूरी की गई, जिससे शक न हो।
कैसे रची गई साजिश
शादी के सिर्फ 12 दिन बाद, 23 मई को सोहरा के वेई सॉडोंग झरने के पास राजा की हत्या कर दी गई। हत्या को अंजाम देने के लिए राज कुशवाहा ने विशाल सिंह चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को पैसे देकर शामिल किया। चार्जशीट में कहा गया है कि इससे पहले भी तीन बार राजा की जान लेने की कोशिश की गई थी, लेकिन वो नाकाम रही।
घटनाक्रम की टाइमलाइन
11 मई: सोनम और राजा की शादी इंदौर में हुई
20 मई: दोनों शिलांग और फिर सोहरा पहुंचे
23 मई: होम स्टे से चेकआउट किया गया, उसी दिन राजा की हत्या की गई
26 मई: दोनों लापता, तलाशी अभियान शुरू
31 मई: राजा का स्कूटर ढाबे के पास मिला
2 जून: खाई से क्षत-विक्षत शव बरामद
8-11 जून: सोनम, राज और अन्य मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी
22-25 जून: सबूत नष्ट करने के आरोप में तीन और गिरफ्तारियां
पुलिस का दावा और चार्जशीट की अहम बातें
पूर्वी खासी हिल्स के एसपी विवेक सैयम के अनुसार, यह एक योजनाबद्ध हत्या थी जिसमें पत्नी, प्रेमी और भाड़े के हमलावर शामिल थे। चार्जशीट में हत्या की पूरी रूपरेखा के साथ-साथ घटनाओं की विस्तृत टाइमलाइन भी दी गई है। केस की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की गई, जिसने एक हफ्ते में ही शव बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
अब तक गिरफ्तार आरोपी
चार मुख्य आरोपी—सोनम रघुवंशी, राज कुशवाहा, विशाल सिंह, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी—फिलहाल पुलिस की हिरासत में हैं। इनके अलावा साजिश में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल प्रॉपर्टी डीलर सिलोम जेम्स, फ्लैट मालिक लोकेंद्र तोमर और सुरक्षा गार्ड बलबीर अहिरवार को सबूत मिटाने के आरोप में पकड़ा गया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई।
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