Up kiran,Digital Desk : वर्ष 2026 के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने बिना किसी खास जोश के शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती जरूर दिखी, लेकिन तंबाकू उत्पादों पर सरकार की ओर से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की घोषणा के बाद बाजार की रफ्तार थम गई। आईटीसी समेत सिगरेट कंपनियों में भारी बिकवाली देखने को मिली, वहीं विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 32 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 85,188.60 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स करीब 350 अंकों के दायरे में घूमता रहा। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी हल्की बढ़त के साथ 26,146.55 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों में छुट्टी और घरेलू नीतिगत फैसलों के चलते निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आए।
दिन की सबसे बड़ी गिरावट तंबाकू सेक्टर में देखने को मिली। केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और पान मसाला पर हेल्थ सेस लगाने की अधिसूचना जारी की है। इसके बाद निवेशकों ने इन शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। आईटीसी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया में 17 प्रतिशत से ज्यादा टूट देखने को मिली। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयर भी दबाव में रहे।
हालांकि गिरावट के माहौल में बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा दिया। एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एलएंडटी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
संस्थागत निवेशकों की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर बाजार से पैसा निकाला। आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने करीब 3,597 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 6,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की।
वैश्विक स्तर पर भी संकेत ज्यादा मजबूत नहीं रहे। नए साल की छुट्टियों के चलते कई एशियाई और यूरोपीय बाजार बंद थे, जबकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी। इसका असर भारतीय बाजार की शुरुआती चाल पर भी दिखा।
हालांकि पिछला साल यानी 2025 शेयर बाजार के लिए काफी शानदार रहा था। पूरे साल सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत रिटर्न दिया था। लेकिन साल 2026 की शुरुआत तंबाकू सेक्टर पर बढ़े टैक्स और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण थोड़ी दबाव भरी रही। बाजार की नजर अब आने वाले बजट और तीसरी तिमाही के नतीजों पर टिकी है, जो आगे की दिशा तय कर सकते हैं।




