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Career Story: दुनिया की सबसे नामी विश्वविद्यालयों में से एक कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में डॉक्टरेट (PhD) करने वाली मरिका निहोरी की कहानी यह साबित करती है कि शिक्षा की ऊंची डिग्री के बावजूद अच्छे करियर के लिए संघर्ष की कोई सीमा नहीं होती। कैम्ब्रिज से पढ़ाई खत्म करने के बाद नौकरी के लिए जब वह दर-दर भटकीं, तो उन्हें यह एहसास हुआ कि अच्छी नौकरी पाने के लिए सिर्फ डिग्री ही पर्याप्त नहीं है। इस दौरान उन्हें 70 से अधिक कंपनियों से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। युवती की यह यात्रा उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो मानते हैं कि प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करना ही सफलता की कुंजी है।

कैम्ब्रिज से PhD के बाद भी नहीं मिली नौकरी

मरिका निहोरी ने बीते वर्ष अक्टूबर में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में बताया कि चार साल की कठिन मेहनत के बाद कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में डॉ. की डिग्री हासिल करने के बाद वो अपनी नौकरी की तलाश में थीं। शुरुआत में उन्हें विश्वास था कि अब उन्हें आसानी से एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिल जाएगी, मगर वास्तविकता कुछ और ही थी। उन्हें महीनों तक नौकरी की तलाश करनी पड़ी और इस दौरान वह 70 से ज्यादा कंपनियों से रिजेक्ट हो गईं।

ये स्थिति किसी के लिए भी निराशाजनक हो सकती है, मगर मरिका ने इस अनुभव को अपने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि वह नहीं जानती थीं कि नौकरी की खोज इतनी कठिन होगी। उनके लिए यह एक बड़ा झटका था। खासकर तब जब उन्होंने इतनी मेहनत और समय के बाद डिग्री प्राप्त की थी।

आगे कहती हैं कि मैं अक्सर खुद की तुलना उन दोस्तों से करती थी, जिन्होंने PhD नहीं की और अब उनका जीवन कैसा है। मुझे लगता था कि हर कोई अपने करियर और जीवन में आगे बढ़ रहा है। सिर्फ मैं ही सफल नहीं हो पाईं।

बता दें कि लंबे संघर्ष के बाद मरिका को अंततः एक बायोटेक स्टार्टअप में नौकरी मिल गई। ये जॉब उन्हें उनकी मेहनत के बाद ही मिली, और यह एक सकारात्मक संकेत है कि किसी भी संघर्ष के बाद अंततः सफलता मिल सकती है।

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