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Up Kiran, Digital Desk: गाजा के आम लोगों के लिए शनिवार का दिन काला साबित हुआ। इजरायली सेना के हवाई हमलों ने घरों को मलबे में तब्दील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से पता चला कि 24 जिंदगियां खत्म हो गईं और 54 लोग चोटिल हुए। इनमें ज्यादातर बच्चे थे जो अब अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र योजना पर खतरा मंडराया

सोमवार को ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिकी प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। इसमें गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तैनाती और अस्थायी शासन की बात थी। ऊपर से स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का सपना भी जोड़ा गया। लेकिन इन हमलों ने सब कुछ दांव पर लगा दिया। अब सवाल उठ रहा है कि शांति की राह कितनी मुश्किल हो जाएगी।

रिमाल से देइर अल-बालाह तक बर्बादी की कहानी

गाजा सिटी के रिमाल इलाके में एक गाड़ी पर गिरे बम ने 11 लोगों को लील लिया। 20 से ज्यादा जख्मी हो गए जिनमें बच्चे ही बहुमत में थे। शिफा अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि ये मासूम अब दर्द से तड़प रहे हैं। अल-अवदा अस्पताल के आसपास एक मकान पर धावा हुआ तो तीन जानें गईं और 11 लोग घायल। नुसेरात कैंप में सात लोग मारे गए जिनमें एक मासूम भी था। देइर अल-बालाह के एक घर पर हमले से तीन और परिवार बिखर गए।

प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: धुंध और दहशत

खलील अबू हातब जैसे गाजा के निवासी आज भी उस धमाके को याद कर सिहर उठते हैं। उन्होंने कहा कि अचानक आसमान फट पड़ा। धुआं चारों तरफ छा गया। यह शांति का दौर कितना कमजोर है। यहां कहीं भी इंसान को सुकून नहीं मिल रहा। लोग डरे हुए हैं कि कब फिर कोई हमला हो जाए।