img

Up kiran,Digital Desk : युद्ध के मैदान में जब तकनीक जवाब दे जाती है और चारों तरफ दुश्मन की फौज खड़ी हो, तब इंसान को सिर्फ एक ही सहारा नजर आता है। कुछ ऐसा ही हुआ ईरान के दुर्गम पहाड़ों और जंगलों के बीच फंसे उस अमेरिकी पायलट के साथ, जिसका एफ-15 (F-15) विमान मार गिराया गया था। 48 घंटों तक मौत से लुका-छिपी खेलने के बाद जब पायलट का अपनी सेना से संपर्क हुआ, तो उसने जो रेडियो संदेश भेजा, वह किसी सैन्य कोड या ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं था। उसने भावुक होकर कहा— 'ईश्वर सर्वशक्तिमान है' (God is Almighty)।

7 हजार फीट की चोटी और इनाम का खौफ

ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिका के दो विमानों को मार गिराया है। पायलट को जिंदा पकड़ने के लिए ईरानी सेना ने न केवल बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया, बल्कि आम नागरिकों के लिए भारी-भरकम इनाम की घोषणा भी कर दी थी। ऐसे में पायलट के लिए हर बीतता पल भारी था। Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, पकड़े जाने के डर से अमेरिकी पायलट कड़ाके की ठंड में 7 हजार फीट ऊंची एक चोटी पर चढ़ गया था। उसके पास सिर्फ एक सर्वाइवल किट और एक पिस्टल थी, जिसके दम पर उसने दो रातें पहाड़ों की गुफाओं में गुजारीं।

ट्रेनिंग में नहीं सिखाया गया था यह 'कोड वर्ड'

अमेरिकी वायुसेना के पायलटों को ऐसी स्थितियों के लिए बेहद सख्त ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें खास 'कोड वर्ड्स' (Code Words) रटाए जाते हैं ताकि वे अपनी लोकेशन और स्थिति की जानकारी गुप्त रूप से दे सकें। लेकिन जब रेडियो सेट चालू हुआ, तो पायलट के मुंह से निकले शब्दों ने कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारियों को भी चौंका दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब इंसान मौत के इतने करीब होता है, तो उसकी परवरिश और आस्था ही उसकी जुबान पर आती है। दिलचस्प बात यह रही कि जब पायलट को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर लिया गया, तो दूसरी तरफ से भी रेडियो पर जवाब आया— 'ईश्वर सर्वोत्तम है।'

मशीनी युग में भी इंसानी जज्बा ही सर्वोच्च

आज के दौर में भले ही युद्ध एआई (AI), ड्रोन और अत्याधुनिक मशीनों के जरिए लड़े जा रहे हों, लेकिन यह घटना साबित करती है कि युद्ध के मैदान में अंतिम फैसला आज भी इंसानी दिमाग और उसके हौसले से ही होता है। ईरान ने दावा किया कि उसने पायलट को बचाने आए कुछ अमेरिकी हेलिकॉप्टरों को भी निशाना बनाया, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, अमेरिकी पायलट सुरक्षित बेस पर पहुंच चुका है, लेकिन उसका वह 'रेडियो संदेश' अब सैन्य गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक सैनिक ने संकट की घड़ी में सैन्य प्रोटोकॉल के बजाय अपनी आस्था को संदेश का जरिया बनाया।