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शेर जंगल का राजा और फिर बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु (National Animal) क्यों है? बाघ वास्तव में बिल्ली परिवार का सदस्य है तो एक बड़ी बिल्ली हमारी राष्ट्रीय पशु कैसे बन गई। वैसे अगर शरीर की ताकत को देखा जाए तो हाथी और कद, तो जिराफ हमारा राष्ट्रीय पशु होना चाहिए। तब आपने सोचा होगा कि इस जानवर को हमारे National Animal के रूप में क्यों चुना गया। तो आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब

जैसा कि हम सभी जानते हैं हर एक राष्ट्रीय चिन्ह को चुनने के कई वजहें होती हैं। ठीक उसी तरह टाइगर को National Animal के रूप में चुने जाने के कई कारण थे। जिसमें से सबसे मुख्य कारण बाघ का फुर्तीलापन, ताकतवर और दृढ़ता का होना है और इन्हीं वजहों से बाघ को National Animal के रूप में चुना गया।

बाघ के लिए ऐतिहासिक बैठक हुई

सन् 1969 की सर्दियों में, भारत की राजधानी नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक बैठक हुई। बंगाल टाइगर के भाग्य का फैसला करने के लिए 10वीं IUCN महासभा में दुनिया भर के विशेषज्ञ शामिल हुए। शिकारियों और वाणिज्यिक सफारी संचालकों के एक संयुक्त समूह के विरोध के बावजूद फैसला बाघों के पक्ष में आया।

बाघ को लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाघों को बचाने के लिए 1972 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया गया था। बड़े जानवरों को बचाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण परियोजना थी। दुनिया में बिल्लियों की 36 से भी ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें टाइगर को सबसे बड़ी बिल्ली के तौर पर जाना जाता है।

भारत में बंगाल टाइगर शेरों से बड़े होते हैं और अपने विशेष गुणों के कारण उन्हें जंगल का राजा कहा जाता है। बंगाल टाइगर जंगल में अपनी क्रूरता के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों ने दहाड़ने वाली बड़ी बिल्लियों में चार जानवरों को शामिल किया है। इनमें शेर, बाघ, जगुआर और तेंदुए शामिल हैं।

जब बात बंगाल टाइगर की आती है तो इनके गले की दहाड़ किसी को भी डराने के लिए काफी होती है। जैसे ही उनकी दहाड़ जंगल में गूंजती है, पूरा इलाका दहशत में आ जाता है। वन्य जीवों की दुनिया में इसे कॉलिंग कहा जाता है।