
Up Kiran, Digital Desk: दिल्ली में कर्नाटक भवन, जो कर्नाटक सरकार का दिल्ली स्थित मेहमानघर है, आजकल गलत कारणों से सुर्खियों में है. यहाँ तैनात दो वरिष्ठ IAS अफ़सरों – एम. इनकोंग्ला जामिर (रेजिडेंट कमिश्नर) और आकृति बंसल (अतिरिक्त रेजिडेंट कमिश्नर) पर सरकारी सुविधाओं के बेजा इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे हैं. ये आरोप किसी और ने नहीं, बल्कि श्रीनिवास एल. नामक एक व्यक्ति ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को शिकायत भेजकर लगाए हैं.
लाखों के बिल और चहेतों को तरजीह?
शिकायत के मुताबिक, अतिरिक्त रेजिडेंट कमिश्नर आकृति बंसल, जो पिछले तीन साल से यहाँ काम कर रही हैं, पर अनियमित वित्तीय लेन-देन के आरोप हैं.इसमें उनकी पिछली पोस्टिंग से जुड़े लगभग ₹6 लाख रुपये और मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) के नाम पर करीब ₹27 लाख रुपये के दावों का ज़िक्र है, जो कर्नाटक भवन के अकाउंट विभाग से लिए गए हैं. सबसे हैरानी की बात तो यह है कि बताया जा रहा है कि जिस अस्पताल में ये खर्च किए गए, वह सरकारी पैनल में था ही नहीं, फिर भी इन बिलों को रिकॉर्ड समय में पास कर दिया गया.
वहीँ, दूसरी तरफ़ एक ग्रेड-1 स्टाफ सदस्य का उदाहरण भी दिया गया है, जिसे सरकारी पैनल वाले अस्पताल में गंभीर किडनी का इलाज कराने के बावजूद लगभग ₹17 लाख रुपये की सरकारी प्रतिपूर्ति (reimbursement) आज तक नहीं मिली है. यह मामला दिखाता है कि सुविधाएँ सिर्फ़ कुछ चुनिंदा लोगों के लिए थीं.
सरकारी गाड़ी और आवास का मनमाना इस्तेमाल
आरोप सिर्फ़ वित्तीय लेन-देन तक ही सीमित नहीं हैं. शिकायत में कहा गया है कि अफ़सर बंसल को मिला सरकारी आवास उनके रिश्तेदारों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है. यही नहीं, उनकी सरकारी गाड़ियाँ भी रोजाना लगभग 150-160 किलोमीटर लंबी दूरी की यात्राओं के लिए इस्तेमाल होती हैं, जिसकी वजह से हर महीने 35,000-40,000 रुपये का भारी-भरकम पेट्रोल का खर्च आ रहा है. यह सरासर सरकारी खजाने का दुरुपयोग है.
सबसे बड़ा सवाल तो रेजिडेंट कमिश्नर एम. इनकोंग्ला जामिर पर भी खड़ा होता है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि जामिर इन सारी अनियमितताओं को जानते हुए भी चुप रहे. उलटे, वो कथित तौर पर हर महीने कर्नाटक भवन में IAS अफ़सरों की बैठकें और पार्टियों का आयोजन करवाते रहते हैं.
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