Up Kiran, Digital Desk: एक गांव में भ्रमण के दौरान राजा को एक स्थान बेहद पसंद आया। उसने वहीं भव्य महल बनवाने का फैसला किया। कुछ ही महीनों में निर्माण पूरा हुआ और शाही परिवार वहां रहने लगा। महल के ठीक सामने एक पुरानी झोपड़ी थी। उसमें एक बुजुर्ग महिला रहती थी। हर सुबह शाही परिवार की नजर उसी झोपड़ी पर जाती थी। यह दृश्य उन्हें असहज करता था।
प्रशासन का आदेश और जनता की प्रतिक्रिया
कुछ समय बाद राजा ने सैनिकों को बुलाया। निर्देश दिया गया कि महिला को धन देकर वहां से हटने को कहा जाए। सैनिकों ने प्रस्ताव रखा पर महिला ने मना कर दिया। मामला बढ़ा तो उसे दरबार में लाया गया। राजा ने आदेश का पालन करने की बात कही। साथ ही बल प्रयोग की चेतावनी भी दी।
कमजोर की आवाज और बड़ा सवाल
महिला ने शांत स्वर में अपनी बात रखी। उसने कहा कि जब वह महल और बाग देख सकती है तो उसकी छोटी झोपड़ी से किसी को क्या हानि है। उसने शक्ति के उपयोग पर सवाल उठाया। कमजोर पर दबाव डालने की नैतिकता पर भी प्रश्न खड़े किए।
शासन का आत्ममंथन
यह सुनकर राजा को अपनी कठोरता का एहसास हुआ। उसने क्षमा मांगी और महिला को सम्मान के साथ विदा किया। यह घटना गांव में चर्चा का विषय बनी। लोगों ने इसे सत्ता के साथ संवेदना की जरूरत के रूप में देखा।
सीख जो समाज तक पहुंची
कहानी यह संदेश देती है कि अधिकार से बड़ा दायित्व होता है। ताकत का सही उपयोग ही सच्चा शासन है। कमजोर की आवाज सुनना ही समाज को मजबूत बनाता है।
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