Up Kiran, Digital Desk: लुधियाना में वर्धमान ग्रुप के प्रमुख एस.पी. ओसवाल के साथ साइबर ठगी का मामला तूल पकड़ चुका है। यह मामला अब और भी गहरा हो गया है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री के बाद लुधियाना पुलिस की जांच में तेजी आई है। पुलिस ने अब तक कई संदिग्धों की पहचान की है और नए गिरफ्तारियों की भी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार लुधियाना पुलिस ने असम के दो आरोपी अर्पित राठौर और रूमी कलिता को गिरफ्तार करने की योजना बनाई है, जिनका नाम ED की जांच में सामने आया है।
ED की जांच से मामले में गहराई आई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह साइबर ठगी से जुड़ा मामला पहले भी पुलिस की नजर में था, लेकिन जब ED ने इस मामले की जांच शुरू की, तो कई नई जानकारियां सामने आईं। अर्पित राठौर, जिनका नाम पहले जांच में नहीं था, ED की जांच के बाद आरोपी के रूप में सामने आए। वहीं रूमी कलिता पहले से ही पुलिस के रडार पर था, और अब उसे ED ने हिरासत में लिया है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग और पैसों के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की है, जो लुधियाना पुलिस की मूल जांच को और मजबूत करेगा।
अतीत में हुई गिरफ्तारियां और आगे की कार्रवाई
इस मामले में अब तक कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मई 2025 में लुधियाना पुलिस ने गुवाहाटी से अतनु चौधरी को गिरफ्तार किया था। हालांकि, चौधरी को बाद में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसने पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया। इसके अलावा पुलिस ने कई संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें निम्मी भट्टाचार्जी, आलोक रांगी, गुलाम मोर्तजा और संजय सूत्रधार शामिल हैं। रूमी कलिता को अब ED ने गिरफ्तार किया है, जिससे मामले की जांच को नया मोड़ मिला है।
साइबर ठगी की साजिश: कैसे बुजुर्ग उद्योगपति को किया शिकार
लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 31 अगस्त 2024 को एक FIR दर्ज की गई थी। मामले की शिकायत में बताया गया कि साइबर ठगों ने बुजुर्ग उद्योगपति एस.पी. ओसवाल को अपनी योजनाबद्ध साजिश से शिकार बना लिया। ठगों ने उद्योगपति पर लगातार नजर रखी और उनके संपर्कों को सीमित करने के लिए उन्हें निर्देशित किया। इसके बाद ठगों ने उन्हें बड़ी रकम की ठगी का शिकार बना लिया।



