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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाना शुरू कर दिया है। अगर आपको लग रहा है कि ईरान और वेनेजुएला पर कार्रवाई ही ट्रंप का अंतिम लक्ष्य है, तो आप गलत हैं। ट्रंप प्रशासन एक ऐसे 'महा-प्लान' पर काम कर रहा है, जो दुनिया का भूगोल और भू-राजनीति (Geopolitics) दोनों बदल सकता है। उनके युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने 'ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका' की नई रणनीति पेश कर सनसनी फैला दी है।

क्या है 'ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका' की नई बिसात?

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन अब केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने अलास्का से लेकर पनामा और ग्रीनलैंड से लेकर गुयाना तक के विशाल क्षेत्र को 'ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका' के रूप में परिभाषित किया है। हेगसेथ के मुताबिक, इस पूरे उत्तरी गोलार्ध को एक साझा सुरक्षा क्षेत्र माना जाना चाहिए, जिसकी कमान सीधे तौर पर अमेरिका के हाथ में होगी। यह रणनीति पुरानी 'मुनरो डॉक्ट्रीन' का एक आक्रामक और आधुनिक अवतार नजर आ रही है।

भारत की 'ग्लोबल साउथ' नीति को सीधी चुनौती

ट्रंप का यह कदम भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। भारत लंबे समय से 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों का समूह) की आवाज बनकर उभरा है। गुयाना जैसे देश, जिन्हें भारत ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा मानता है, अब ट्रंप के 'ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका' जोन में शामिल किए जा रहे हैं। हेगसेथ ने स्पष्ट कहा कि गुयाना, क्यूबा और वेनेजुएला को ग्लोबल साउथ से अलग हटकर अमेरिकी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा माना जाना चाहिए। यह सीधे तौर पर भारत के कूटनीतिक प्रभाव को चुनौती देने जैसा है।

खर्चे का बोझ सहयोगियों पर, कमान अमेरिका के हाथ

ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस 'साझा सुरक्षा क्षेत्र' की रक्षा का खर्च केवल वाशिंगटन नहीं उठाएगा। क्षेत्र के अन्य देशों को भी अपनी जेब ढीली करनी होगी। कनाडा को '51वां राज्य' बनाने की कोशिश, ग्रीनलैंड को हथियाने का दांव और मादुरो को जेल भेजने के बाद अब ट्रंप का अगला निशाना क्यूबा हो सकता है। अमेजन के जंगलों और एंडीज पर्वतमाला को प्राकृतिक सीमा मानकर ट्रंप ने उत्तर और दक्षिण अमेरिका का नया बंटवारा कर दिया है।

मुनरो डॉक्ट्रीन 2.0: अमेरिका फिर बनेगा 'दुनिया का पुलिसमैन'?

ट्रंप की इस नीति का मकसद उत्तरी गोलार्ध में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपस्थिति को कई गुना बढ़ाना है। नाटो सहयोगियों से अनबन और सहयोगियों को 'कायर' बताने वाले ट्रंप अब एक ऐसा ब्लॉक बनाना चाहते हैं, जहां सिर्फ उनकी मर्जी चले। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के तहत दशकों पुरानी वैश्विक व्यवस्था को मलबे में तब्दील करने पर तुले हुए हैं, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और सुरक्षा संधियों पर गहराई से पड़ेगा।