Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बार फिर अपने पुराने मित्र रूस का हाथ थाम लिया है। डेटा एजेंसी 'केपलर' के हालिया आंकड़े बताते हैं कि रूस से भारत का कच्चा तेल आयात पिछले तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच रूस, भारत का सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बना हुआ है।
आयात के आंकड़ों ने बनाया रिकॉर्ड
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान-अमेरिका तनातनी के कारण खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है। ऐसे में भारत ने रूस से अपनी खरीदारी तेज कर दी है:
मार्च 2026 का रिकॉर्ड: भारत ने रूस से औसतन 19.8 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल आयात किया, जो जून 2023 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
अप्रैल की स्थिति: अप्रैल में आयात थोड़ा घटकर 15.7 लाख bpd रहा, लेकिन यह गिरावट किसी प्रतिबंध की वजह से नहीं बल्कि नायरा एनर्जी की रिफाइनरी में चल रहे मेंटेनेंस के काम के कारण आई है। अधिकारियों का मानना है कि अगले महीने से यह फिर रफ्तार पकड़ेगा।
अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील और भारत की रणनीति
मार्च की शुरुआत में अमेरिका द्वारा रूसी तेल प्रतिबंधों में दी गई ढील का भारत ने भरपूर लाभ उठाया है। भारत ने अकेले मार्च में करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा। रिफाइनरी विशेषज्ञों का कहना है कि यह खरीदारी पूरे साल इसी स्तर पर बनी रह सकती है, क्योंकि वर्तमान में वैश्विक बाजार में विकल्प सीमित हैं।
सस्ते एलएनजी (LNG) का भी मिला साथ
तेल के साथ-साथ भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के लिए भी काफी हद तक होर्मुज जलमार्ग पर निर्भर है। इस संकट को देखते हुए रूस ने भारत को सस्ते एलएनजी (LNG) का प्रस्ताव दिया है:
भारी छूट: रूस ने एशियाई देशों, विशेषकर भारत को एलएनजी की खरीद पर 40% तक का डिस्काउंट ऑफर किया है। यह कदम भारत में रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मददगार साबित हो सकता है।
भारत का रुख: "ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि"
तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की प्राथमिकता अपनी घरेलू ऊर्जा मांग को पूरा करना है। भारत ने दुनिया को संदेश दिया है कि तेल खरीदने का फैसला व्यावसायिक और तकनीकी आधार पर लिया जाता है। यानी, जो तेल रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त और सस्ता होगा, भारत उसे ही खरीदेगा।
विशेषज्ञों की राय
सिंगापुर की 'वांडा इनसाइट्स' की संस्थापक वंदना हरी के अनुसार, जब तक पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) में सप्लाई का संकट बना रहेगा, भारत रूस से अधिकतम तेल लेने की कोशिश करेगा। यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा समुद्री खरीदार बना हुआ है और वर्तमान युद्ध ने इस साझेदारी को और मजबूत कर दिया है।




