Up kiran,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव और 'नेवल ब्लॉकेड' (समुद्री नाकाबंदी) के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने मुस्लिम देश सीरिया से अपनी पूरी फौज वापस बुला ली है। गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को अमेरिकी सैनिकों का आखिरी काफिला अपने साजो-सामान के साथ सीरियाई सीमा को पार कर जॉर्डन की ओर रवाना हो गया। इसी के साथ सीरिया में आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका के 10 साल पुराने सैन्य अभियान का आधिकारिक तौर पर अंत हो गया है।
प्रमुख ठिकानों की वापसी: हसाका से अल-तनफ तक
ताजा अपडेट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हसाका प्रांत स्थित अपने सबसे बड़े एयरबेस 'कसराक' (Qasrak Air Base) को पूरी तरह खाली कर इसे सीरियाई सरकार के हवाले कर दिया है।
सुनियोजित वापसी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह एक 'सुनियोजित और परिस्थितियों पर आधारित' फैसला है।
अन्य बेस: इससे पहले फरवरी 2026 में ही अमेरिका ने जॉर्डन सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अल-तनफ (Al-Tanf) और उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-शद्दादी बेस को खाली कर दिया था।
सीरिया की 'बड़ी जीत' और नई संप्रभुता
सीरिया की नवगठित सरकार (अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाली) ने अमेरिकी सेना के जाने को अपनी बड़ी संप्रभु जीत बताया है।
कुर्दिश समझौता: सीरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह वापसी दमिश्क सरकार और कुर्द नेतृत्व वाली 'सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस' (SDF) के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते का परिणाम है।
जिम्मेदारी का हस्तांतरण: समझौते के तहत अब सीरियाई सेना आईएसआईएस के बचे हुए आतंकवादियों और क्षेत्र की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद संभालेगी।
ईरान युद्ध का असर: क्या अमेरिका को लगा है झटका?
विशेषज्ञ इस वापसी को ईरान के साथ जारी युद्ध के चश्मे से भी देख रहे हैं:
सुरक्षा जोखिम: इराक और सीरिया में सक्रिय ईरान समर्थित लड़ाकों द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमलों का खतरा बना हुआ था। ऐसे में अपनी सेना को एक असुरक्षित मोर्चे से हटाना अमेरिका की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रणनीतिक बदलाव: 28 फरवरी 2026 को ईरान के साथ युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) शुरू होने के बाद से अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत को ईरान की नाकाबंदी और समुद्री मिशनों पर केंद्रित कर रहा है।
क्या ISIS फिर से सिर उठाएगा?
अमेरिका की इस वापसी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि अमेरिका ने 5,700 से अधिक आईएसआईएस कैदियों को इराक की जेलों में ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि अमेरिकी मौजूदगी खत्म होने से क्षेत्र में फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह 'आतंकवाद विरोधी' अभियानों में अपने सहयोगियों को तकनीकी सहायता देता रहेगा।




