Up Kiran, Digital Desk: हाल ही में बांग्लादेश के चटगांव क्षेत्र में अमेरिकी सेना और वायुसेना के अधिकारियों का एक दल पहुंचा है, जिसने इलाके में न केवल सुरक्षा स्थिति को बल्कि रणनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान चटगांव के अमानत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा, जो सामान्यतः जापान के योकोटा स्टेशन पर तैनात रहता है। इस विमान में सवार 120 अमेरिकी अधिकारी चुपके से चटगांव के एक होटल में पहुंचे, जहां उनके लिए पहले से कमरे बुक थे, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि उनके नाम होटल के रजिस्टर में दर्ज नहीं किए गए। क्या इसका कोई गुप्त संदेश है?
मोहम्मद यूनुस के शासन में अमेरिकी गतिविधियाँ बढ़ी
जब से मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने हैं, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों ने तेज़ी से गति पकड़ी है। अमेरिका और चीन दोनों म्यांमार के विद्रोही समूहों को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार सक्रिय हैं। बांग्लादेश में संयुक्त सैन्य अभ्यासों और टोही मिशनों का सिलसिला भी जारी है। इसी वर्ष दोनों देशों के बीच ऑपरेशन पैसिफिक एंजेल-25 और टाइगर लाइटनिंग-2025 अभ्यास चटगांव में आयोजित हुए थे। अब एक बार फिर अमेरिकी सैन्य दल ने चटगांव में कदम रखा है, जो और भी सवाल उठाता है कि इसके पीछे का मकसद क्या है।
आधिकारिक और गुप्त मिशन का मिलाजुला प्रभाव
सैन्य अधिकारियों की चुपचाप उपस्थिति और होटल के रजिस्टर में नाम न होना कुछ संदेह पैदा करता है। क्या यह किसी गुप्त सैन्य मिशन का हिस्सा है? इसके अलावा, 14 सितंबर को मिस्त्र की वायुसेना का ट्रांसपोर्ट विमान भी चटगांव एयरपोर्ट पर लैंड किया, जिससे इलाके में विदेशों से सैन्य गतिविधियों की बढ़ती संख्या को लेकर कई सवाल उठे हैं।
अमेरिकी सेना और श्रीलंकाई वायुसेना का संयुक्त अभ्यास
इस बार बांग्लादेश में एक विशेष सैन्य अभ्यास "पैसिफिक एंजेल 25-3" का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अमेरिकी सेना के साथ-साथ श्रीलंकाई वायुसेना भी शामिल है। यह अभ्यास आपदा प्रतिक्रिया, मानव सहायता और क्षेत्रीय साझेदारी के लिए चार दिन तक चलेगा। यह एक अमेरिकी पहल है जो पिछले दस वर्षों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आयोजित की जा रही है। हालांकि, ऐसे अभ्यासों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है।
भारत के लिए क्या मायने रखती है बांग्लादेश में अमेरिकी मौजूदगी?
भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में तनाव बढ़ा है, विशेषकर टैरिफ और रूस से तेल आयात के मुद्दे को लेकर। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश की जा रही है, लेकिन स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं हुई है। बांग्लादेश में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि चटगांव का इलाका भारत की सीमा के नजदीक है। अमेरिका इस क्षेत्र को निगरानी और अन्य देशों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की नई लकीर खींची जा सकती है।




