Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचे गए अमर गीत 'वन्दे मातरम' को सिर्फ एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज बताया है। लखनऊ में 'वन्दे मातरम' के गौरवशाली इतिहास और महत्व पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि यह वह दिव्य मंत्र था जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी और आज भी यह हमें एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
'जिस गीत ने जगा दी थी आजादी की ज्वाला'
मुख्यमंत्री योगी ने उस दौर को याद किया जब ब्रिटिश शासन में 'वन्दे मातरम' गाना एक बहुत बड़ा अपराध माना जाता था। उन्होंने कहा, "सोचिए, एक ऐसा समय था जब इस गीत को गाने पर अंग्रेजी हुकूमत लोगों पर गोलियां चला देती थी, उन्हें जेल में डाल देती थी। लेकिन भारत के वीर सपूतों ने कभी इसकी परवाह नहीं की। यह गीत जितना दबाया गया, इसकी ज्वाला उतनी ही तेज भड़की।"
उन्होंने कहा कि 'वन्दे मातरम' ने ही असल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक जन-आंदोलन में बदल दिया था। यह गीत देश के हर नागरिक, हर क्रांतिकारी के लिए आजादी का प्रतीक बन गया था। यह सिर्फ कुछ शब्द नहीं थे, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और उनके संकल्प की अभिव्यक्ति थी।
'संस्कृति से ही बचेगा राष्ट्र'
सीएम योगी ने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई भी राष्ट्र सिर्फ अपनी सीमाओं से नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और अपनी पहचान से महान बनता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी संस्कृति और अपनी विरासत पर गर्व करना नहीं जानते, उनका पतन निश्चित है। 'वन्दे मातरम' हमारी उसी महान संस्कृति का प्रतीक है।
उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने 'आनंदमठ' उपन्यास के जरिए 'वन्दे मातरम' जैसा अमर गीत देकर भारत पर एक बहुत बड़ा उपकार किया है। यह गीत आज भी हमें याद दिलाता है कि हमारा देश हमारे लिए सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी माँ है, और इसकी सेवा करना हमारा परम धर्म है।
मुख्यमंत्री योगी का यह संबोधन हमें 'वन्दे मातरम' के उस गहरे अर्थ और इतिहास को फिर से याद करने का अवसर देता है, जिसे शायद आज की पीढ़ी भूलती जा रही है। यह हमें बताता है कि यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि हमारे देश का स्वाभिमान और गौरव है।




