64 करोड़ 82 लाख की एफडी का फर्जी खाता मामले में सीबीआई की जाँच जारी है जिसको लेकर वन निगम से लेकर शासन तक इस मामले पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ये जरूर चर्चा में है कि शासन स्तर पर इस मामले को लेकर किसी कमेटी का गठन होने जा रहा है। हालाँकि इस तरह की एक कमेटी का गठन पूर्व में भी हो चुका है जिसमें वन निगम के ही एक भ्रष्ट अफसर दविंदर सिंह के भ्रष्टाचार को लेकर पहले तो निगम से लेकर शासन सत्ता में बैठे लोग अपनी आँखें मूंदे रहे, जाँच में हिलाहवाली करते रहे, यहाँ तक कि वो भ्रष्ट अफसर शासन सत्ता को ठेंगा दिखाते हुए निगम की सेवा से रिटायर भी हो गया। मामले को लेकर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह से पुछा गया तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए रिटायर्ड अफसर दविंदर सिंह को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सभी देयकों को रोकने का आदेश जारी कर दिया जिसके बाद से अभी तक दविंदर सिंह को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले सभी लाभों से वंचित हैं। मामलें की जांच के लिए शासन स्तर पर कमेटी का गठन किया गया जिसमें तत्कालीन विशेष सचिव गौरव वर्मा को कमेटी का अध्यक्ष, तत्कालीन पीसीसीएफ ममता संजीव दूबे और विषय विशेषज्ञ के रूप में निगम से सदस्य बनाया गया. फ़िलहाल आज की तारीख में शासन द्वारा गठित उस कमेटी का कुछ भी अता पता नहीं है. शासन सत्ता में बैठे शीर्ष लोग भी मौन धारण किये हुए हैं।

इससे पहले हमने आपको निगम की यूनियन के धुरंधरों की एक खबर दी थी जिसमें हमने आपको बताया था कि निगम के भ्रष्टाचार में एमडी के कन्धा से कन्धा मिलाकर चलने में यूनियन के कौन लोग हैं। आज हम एक बार फिर चर्चा करेंगे यूनियन के अध्यक्ष गौरव अमोली की जिन्हें वन निगम के भ्रष्ट प्रबंधन की टीम का अहम् हिस्सा मानाजा रहा है। यूनियन निगम में फैले भ्रष्टाचार को लेकर कोई सवाल न खड़ा करे इसके लिए नियम कानून को ताक पर रखकर एमडी वन निगम ने विपणन अधिकारी का चार्ज दे दिया जबकि यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली सहायक वर्ग 2 के लिपिकीय संवर्ग के एक बाबू मात्र हैं। अंदर खाने तो यहाँ तक चर्चा है कि बाईर्कुलेशन के जरिये एमडी अरविन्द कुमार सिंह यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली को विपणन अधिकारी के पदपर नियमित करवाने की फ़िराक में हैं, सूत्रों की माने तो विपणन अधिकारी के पद पर नियमित नियुक्ति पाने को बेताब गौरव अमोली की डील फाइनल हो चुकी है। चर्चा तो यह भी है कि इस बात की जानकारी विभागीय मंत्री को भी है। हालाँकि इसको लेकर जब मंत्री कार्यालय में जानकारी चाही गयी तो बताया गया कि ऐसा कुछ भी नहीं है।
विपणन अधिकारी के प्रभार को लेकर एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह रहस्यमयी छुपी साधे हुए हैं और विपणन अधिकारी का प्रभार यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली को किन परिस्तिथियों में दिया गया इस पर निगम या विभाग से संबंधित कोई भी जिम्मेदार अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है। यहाँ तक कि एमडी अरविन्द कुमार सिंह को उनके नंबर पर मैसेज करके यूनियन अध्यक्ष Gaurav Amoli को विपणन अधिकारी पद पर नियमित करने का कोई प्रस्ताव अध्यक्ष/मंत्री वन को भेजा जाएगा या भेजा गया है, संबंधी जानकारी लेने की कोशिश की गयी लेकिन एमडी वन निगम ने चुप्पी बरकरार रखी।
निगम के साथ फ्रॉड कर चुके हैं गौरव अमोली, जानिए कैसे -
वन निगम में निगम कर्मियों के लिए एक योजना है जिसमें पूरी सर्विस पीरियड में कोई भी निगम कर्मी एक बार अपना खुद का मकान बनवाने के लिए निगम से आधी दरों पर इमारती लकड़ी खरीद सकता है। लेकिन निगम की इसको लेकर चार कठोर शर्ते भी हैं कि -
- पहली शर्त प्रकाष्ठ का उपयोग निजी भवन निर्माण हेतु किया जायेगा।
- दूसरी शर्त के अनुसार , प्रकाष्ठ उपयोग का प्रमाण-पत्र आदेश निर्गत किये जाने की तिथि से एक वर्ष के अंदर अनिवार्य रूपसे प्रस्तुत करना होगा।
- तीसरी शर्त , प्रकाष्ठ का उपयोग न करने अथवा दुरूपयोग किये जाने या उपयोग प्रमाण-पत्र निर्धारित अवधि के अंदर न प्रस्तुत करने पर स्वीकृत प्रकाष्ठ के मूल्य की वसूली बाजार भाव की जाएगी।
- चौथी और आखिरी शर्त है , उक्त की प्रविष्टि संबंधित कार्मिक की सेवा पुस्तिका में की जाएगी।
यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली ने वन निगम की इस योजना का लाभ लेकर दो घन मीटर इमारती लकड़ी निगम से प्राप्त की। निगम में गौरव अमोली द्वारा अपने उत्तराखंड स्थित आवास के निर्माण के लिए निगम से किफायती दर पर दो घन मीटर इमारती लकड़ी प्राप्त की। लेकिन निगम से प्राप्त उस इमारती लकड़ी को लखनऊ लाकर बेंच दिया। इस मामले को लेकर तत्समय निगम में चर्चा तो हुई लेकिन मामले को दबा दिया गया। इस प्रकरण में गौरव अमोली द्वारा निगम की उपरोक्त चारों शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए एक तरह से निगम का मजाक बनाकर रख दिया।
इस मामले में एमडी अरविन्द कुमार सिंह की चुप्पी क्या यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली को बचा पायेगी, ये अभी सवालों के घेरे में है। हालाँकि जिस तरह से यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली पर एमडी मेहरबान हैं उसको देखकर निगम कोई एक्शन लेगा इस पर प्रश्नचिन्ह है !
क्रमश:
_1720548842_100x75.png)
_1479608777_100x75.png)
_1157478640_100x75.png)
_392860009_100x75.png)
_279883181_100x75.png)