धर्म / अध्यात्म डेस्क। सूर्य को संपूर्ण जिव जगत का पिता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य नवग्रहों का राजा है। कुंडली में सूर्य के मजबूत होने से व्यक्ति जीवन में तेजी से तरक्की करता है। उसके भाग्य का द्वार खुल जाते हैं। सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर समाज में व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार भाग्य को प्रबल बनाने के लिए घर में सूर्य यंत्र रखने से नौकरी और व्यापार में उन्नति होती है। आइए, जानते हैं सूर्य यंत्र के बारे में ...
सूर्य सौरी परिवार का मिखिया है। ब्रह्मांड में सभी ग्रह और नक्षत्र सूर्य की परिक्रमा करते हैं। पृथ्वी के सभी जड़ और चेतन पदार्थों पर इसकी रश्मियों का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्य यंत्र को सूर्य ग्रह की शुभता के लिए विशेष रूप से घर में स्थापित करके साधना की जाती है। कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभ स्थिति में सूर्य यंत्र की पूजा आवश्य करनी चाहिए।
वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि परिश्रम के बावजूद सफलता नहीं मिलती तो आपको घर में सूर्य यंत्र रस्खकर जरूर उसकी पूजा करनी चाहिए। सूर्य यंत्र को घर में रखने से सोया भाग्य भी जाग जाता है और आपके रूके हुए काम भी बनना शुरू हो जाते हैं। प्रातःकाल उठकर पहले सूर्य यंत्र की पूजा जरूर करनी चाहिए, इससे नौकरी या व्यवसाय में तरक्की मिलनी तय है।
नया व्यवसाय शुरू करने के पहले व्यावसायिक स्थल पर सूर्य यंत्र को सूर्य यंत्र रखना चाहिए। सुबह काम शुरू करने के पहले सूर्य यंत्र की पूजा करें। इसी तरह घर से वास्तुदोष दूर करने के लिए तांबे के पत्र पर सूर्य यंत्र चिपकाकर स्थापित करें। इससे वास्तुदोष दूर होंगे और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। सूर्य यंत्र की पूजा से व्यक्ति के जीवन से भय, चिंता और शंका आदि का भी शमन होता है।
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