img

Up Kiran,Digital Desk: हम सभी जानते हैं कि सूरज हर दिन पूरब से उगता है और पश्चिम में डूबता है। यह दृश्य न केवल हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा है, बल्कि सदियों से यही क्रम चलता आ रहा है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि यह स्थिरता क्यों बनी रहती है और क्या होता अगर पृथ्वी की घूमने की दिशा बदल जाए?

पृथ्वी के घूमने की दिशा: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

चार अरब साल से भी ज्यादा समय पहले, जब पृथ्वी का निर्माण हुआ, तब सूरज के चारों ओर गैस और धूल का एक विशाल बादल था। इसे सौर नेबुला कहा जाता है। जब यह बादल सिकुड़ा और उसमें गुरुत्वाकर्षण बल काम करने लगा, तो इसने एक तय दिशा में घूमना शुरू किया। यही दिशा आज भी कायम है।

विज्ञान इसे "एंगुलर मोमेंटम" के सिद्धांत से समझाता है। इस सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु घूम रही होती है, तो वह अपनी दिशा तब तक नहीं बदलती, जब तक कोई बाहरी बल उसे प्रभावित न करे। क्योंकि पृथ्वी पर ऐसा कोई बाहरी बल नहीं पड़ा, इसलिए इसकी घूमने की दिशा में बदलाव नहीं आया।

पश्चिम से पूरब की ओर घूमने का परिणाम

पृथ्वी का पूरब से पश्चिम की ओर घूमना हमें सूरज को पूरब से उगते हुए और पश्चिम में डूबते हुए दिखाता है। यह क्रम इतना प्राकृतिक लगता है कि हम कभी इसके बारे में सोचते नहीं। लेकिन यही घूमने की दिशा हमारी जलवायु, मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों को भी प्रभावित करती है।

पृथ्वी की दिशा बदलने से हो सकते हैं गंभीर प्रभाव

यदि कभी पृथ्वी की दिशा बदल जाए और वह पूरब से पश्चिम की ओर घूमने लगे, तो दुनिया में कई बड़े बदलाव आएंगे। सबसे पहला असर सूरज के उदय और अस्त में दिखाई देगा। सूरज पश्चिम में उगने लगेगा और पूरब में डूबेगा। यह बदलाव दृश्य रूप से अजीब जरूर होगा, लेकिन इसके प्रभाव इससे कहीं अधिक गहरे होंगे।

जलवायु में परिवर्तन

पृथ्वी की दिशा बदलने से समुद्र की धाराओं और हवाओं के पैटर्न भी उलट जाएंगे। आज जो गल्फ स्ट्रीम जैसी गर्म धाराएं यूरोप को गर्म रखती हैं, वे कमज़ोर हो सकती हैं या पूरी तरह से खत्म हो सकती हैं। इस कारण यूरोप का मौसम ठंडा हो जाएगा। वहीं, सहारा जैसे रेगिस्तानी क्षेत्र हरे-भरे हो सकते हैं, जबकि अमेज़न का वर्षावन सूखने लगेगा। जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा, और इसका असर सिर्फ मौसम पर नहीं, बल्कि कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ेगा।

जीव-जंतुओं पर प्रभाव

धरती के चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाले प्रवासी पक्षी और जानवर भी संकट में पड़ सकते हैं। उनका नेविगेशन सिस्टम पृथ्वी के घूमने की दिशा पर निर्भर करता है। दिशा बदलने से उनकी यात्रा में भारी गड़बड़ी हो सकती है, जो उनकी अस्तित्व पर असर डाल सकती है।

मानव जीवन में उलटफेर

पृथ्वी की दिशा में बदलाव से सिर्फ प्राकृतिक तंत्र ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि इंसान की बनाई कई व्यवस्थाएं भी असामान्य हो सकती हैं। टाइम ज़ोन, दिन-रात का हिसाब, और मौसम चक्र सभी को फिर से निर्धारित करना पड़ेगा। यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, बल्कि हमारी दिनचर्या भी पूरी तरह से बदल सकती है।