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Up Kiran, Digital Desk: दिल्ली के भाजपा दफ्तर में सालों से टाइपिस्ट का काम करने वाले रामधन कोई बड़ा नेता नहीं हैं। न कोई पद है न कोई बड़ा ओहदा। लेकिन जब उनकी बेटी की शादी हुई तो 23 अगस्त की शाम द्वारका के बैंक्वेट हॉल में देश के गृह मंत्री अमित शाह खुद बाराती बनकर पहुंच गए। दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया, परिवार वालों से गले मिले और थोड़ी देर बैठकर सबकी खैरियत पूछी। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। लोग लिख रहे हैं कि यही भाजपा और संघ परिवार की असली ताकत है।

एक टाइपिस्ट की बेटी की शादी में गृह मंत्री

ये कोई दिखावा नहीं था। न कोई कैमरा पहले से बुलाया गया था न कोई प्रेस रिलीज तैयार थी। अमित शाह चुपचाप पहुंचे, अपना फर्ज निभाया और चले गए। रामधन दफ्तर में पिछले कई दशकों से काम कर रहे हैं। न कभी शिकायत न कभी सुर्खियां। बस चुपचाप अपना काम करते रहते हैं। ऐसे हजारों कार्यकर्ता और कर्मचारी हैं जो पार्टी के इर्द-गिर्द सालों से चक्कर लगाते हैं बिना किसी नाम के। भाजपा ने उन्हें हमेशा अपना परिवार कहा है और इस बार परिवार के साथ खड़ा होने का जीता-जागता सबूत दे दिया।

दुष्यंत गौतम भी पहुंचे, संदेश साफ था

शादी में सिर्फ अमित शाह ही नहीं आए। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम भी परिवार के साथ पहुंचे। उन्होंने भी तस्वीरें शेयर कीं और लिखा कि कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ हैं। ये छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन इनका असर बहुत गहरा होता है। जो कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर दिन-रात मेहनत करता है उसे यह एहसास होता है कि पार्टी उसे भूलती नहीं।

ये कोई नई बात नहीं है

ऐसा पहली बार नहीं हुआ। कुछ महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना से हरियाणा सिर्फ इसलिए पहुंच गए थे क्योंकि उनके निजी सुरक्षा अधिकारी की बेटी की शादी थी। नीतीश पूरे रास्ते हवाई जहाज से आए, आशीर्वाद दिया और वापस लौट गए। ऐसे किस्से संघ और भाजपा के अलावा दूसरी पार्टियों में भी मिल जाएंगे। लेकिन भाजपा और संघ इसे अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। संघ के स्वयंसेवक हो या भाजपा का छोटा से छोटा कार्यकर्ता, संगठन हमेशा कहता रहा है कि परिवार सबसे ऊपर है।