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Up kiran,Digital Desk : ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका और उसके सबसे पुराने सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) के रिश्तों में दरार आ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी के बीच उनके ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो का एक दो साल पुराना सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रहा है, जो अब खुद ट्रंप प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है।

क्या है रुबियो की वो 'वायरल' पोस्ट?

दिसंबर 2023 में, जब मार्को रुबियो फ्लोरिडा से सीनेटर थे, उन्होंने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक कानून का समर्थन करते हुए लिखा था:

"किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के पास सीनेट की मंजूरी के बिना नाटो (NATO) से हटने का एकतरफा अधिकार नहीं होना चाहिए।"

चर्चा में क्यों? यह पोस्ट बुधवार को तब वायरल हुई जब इसे 23 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। विपक्षी नेता (सीनेट में अल्पमत के नेता) चक शूमर ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए रुबियो को उस कानून के लिए "धन्यवाद" दिया, जिसके तहत नाटो छोड़ने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। यह कानून ट्रंप को अपनी मर्जी से गठबंधन तोड़ने से रोकता है।

ट्रंप की नाराजगी की असली वजह: 'कागजी शेर' बना नाटो?

ईरान के खिलाफ चल रहे 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' में यूरोपीय देशों के ठंडे रुख ने ट्रंप को आगबबूला कर दिया है। ट्रंप की नाराजगी के 3 मुख्य कारण हैं:

बेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल मना: इटली और स्पेन ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। वहीं फ्रांस ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है।

होर्मुज में मदद से इनकार: यूरोपीय देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने से मना कर दिया है।

ट्रंप का कड़ा बयान: ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को 'कायर' और 'कागजी शेर' (Paper Tiger) करार दिया है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पुतिन भी जानते हैं कि यह गठबंधन महज दिखावा है।

रुबियो का बदला हुआ सुर: अब क्या कह रहे हैं विदेश मंत्री?

मंगलवार को एक टीवी इंटरव्यू में रुबियो ने अपने पुराने बयान पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उनकी सोच बदल गई है:

एकतरफा रास्ता: रुबियो ने कहा कि नाटो अब 'वन-वे स्ट्रीट' बन गया है। अमेरिका अरबों डॉलर खर्च करता है और सुरक्षा देता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो सहयोगी देश पीछे हट जाते हैं।

उपयोगिता पर सवाल: रुबियो ने सवाल उठाया कि अगर युद्ध के समय हम यूरोपीय ठिकानों का इस्तेमाल ही नहीं कर सकते, तो वहां अमेरिकी सेना रखने का क्या तुक है?

क्या अमेरिका वास्तव में नाटो छोड़ सकता है?

कानूनी रूप से यह बहुत कठिन है। रुबियो द्वारा समर्थित 2023 के कानून के कारण, ट्रंप को नाटो से बाहर निकलने के लिए सीनेट के 100 में से 67 सदस्यों के वोट की जरूरत होगी, जो फिलहाल नामुमकिन दिखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप वास्तव में बाहर निकलने के बजाय इस 'धमकी' का इस्तेमाल यूरोपीय देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने और ईरान युद्ध में मदद करने के लिए दबाव बनाने के हथियार के रूप में कर रहे हैं।