
Up Kiran, Digital Desk: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब इस युद्ध से जुड़ी एक ऐसी ख़बर आई है जिसने सबकी भौंहें चढ़ा दी हैं। उत्तर कोरिया के तानाशाह नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर उन सैनिकों के परिवारों से मुलाक़ात की है, जिनकी जान रूस-यूक्रेन युद्ध में गई है। इस भावुक मुलाकात के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं – क्या वाकई उत्तर कोरिया के सैनिक इस जंग में सीधे शामिल हैं?
क्या है ये भावनात्मक मुलाक़ात?
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने ख़बर दी है कि किम जोंग उन ने युद्ध में मारे गए सैनिकों के शोक संतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने इन परिवारों के बलिदान की सराहना की और उन्हें देश का 'वीर' बताया। आमतौर पर उत्तर कोरियाई शासक इस तरह की मुलाक़ातें सीधे अपने नागरिकों से कम ही करते हैं। इस भावुक मुलाकात ने देश में इस बहस को और तेज़ कर दिया है कि उत्तर कोरिया किस हद तक रूस का साथ दे रहा है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का संकेत?
उत्तर कोरिया का अपने सैनिकों की मौतों पर इस तरह सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना एक महत्वपूर्ण संकेत है।
पुष्टि का डर: उत्तर कोरिया सीधे तौर पर कभी नहीं मानता कि उसके सैनिक दूसरे देशों की लड़ाई में शामिल हैं। यह उनके लिए एक संवेदनशील और गुप्त मुद्दा है। अगर वो ऐसा स्वीकार कर लेते हैं, तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से और कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
रूस के साथ बढ़ती दोस्ती: पिछले कुछ समय से उत्तर कोरिया और रूस के बीच दोस्ती काफ़ी गहरी हुई है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया रूस को हथियार और सैनिक मुहैया करा रहा है, जिसके बदले में रूस उन्हें अनाज, तेल और तकनीक जैसी ज़रूरी चीजें दे रहा है। यह मुलाक़ात कहीं न कहीं इस सैन्य सहयोग की परोक्ष पुष्टि करती है।
किम जोंग उन का यह कदम घरेलू स्तर पर इन सैनिकों के बलिदान को सम्मान देने और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए भी हो सकता है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मंच पर, यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक और चिंता का विषय है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध में एक नया खिलाड़ी भी शामिल हो रहा है।
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