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Up kiran,Digital Desk : दुनिया की नजरें एक बार फिर स्विट्जरलैंड के जिनेवा पर टिकी हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक 'शतरंज' का दूसरा दौर शुरू होने वाला है। वार्ता की मेज सजने से ठीक पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त तेवर अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी दबाव या सैन्य धमकी के आगे घुटने नहीं टेकेगा। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी से मुलाकात के बाद एक "न्यायसंगत और संतुलित समझौते" की उम्मीद तो जताई, लेकिन कड़े शब्दों में चेतावनी भी दी।

जिनेवा में 'कूटनीतिक हलचल': ओमान बना मध्यस्थ

ओमान की मध्यस्थता में होने वाली इस अप्रत्यक्ष वार्ता का दूसरा दौर मंगलवार को जिनेवा में प्रस्तावित है। अराघची ने कहा कि वे ठोस प्रस्ताव लेकर आए हैं, लेकिन अमेरिका को अपनी ईमानदारी साबित करनी होगी। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका प्रतिबंधों (Sanctions) में राहत देता है, तो तेहरान परमाणु मुद्दे पर लचीला रुख अपना सकता है।

ट्रंप का 'प्रेशर गेम' और एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती

वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को मध्य पूर्व (Middle East) भेजने का आदेश दिया है। ट्रंप का रुख स्पष्ट है—ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं मिलेगी। उन्होंने यहां तक संकेत दिए हैं कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

विवाद की जड़: 60% यूरेनियम संवर्धन

असली विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन को लेकर है। ईरान वर्तमान में 60 प्रतिशत तक यूरेनियम समृद्ध कर रहा है, जो परमाणु हथियार बनाने के स्तर (90%) के काफी करीब है। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ईरान के पास मौजूद यूरेनियम भंडार सैद्धांतिक रूप से कई परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, ईरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।

इस्राइल की 'नई शर्तें' और नेतन्याहू का रुख

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात कर इस समझौते में कड़ी शर्तें जोड़ने का आग्रह किया है। इस्राइल चाहता है कि किसी भी डील में:

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म किया जाए।

हमास और हिज्बुल्लाह जैसे समूहों को मिलने वाली फंडिंग रोकी जाए।

इतिहास और टकराव की टाइमलाइन

2025: इस्राइल-ईरान के बीच 12 दिन का भीषण युद्ध हुआ, जिसमें अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर बमबारी की।

युद्ध के बाद: ईरान ने IAEA के साथ सहयोग निलंबित कर दिया और निरीक्षण पर पाबंदी लगा दी।

6 फरवरी 2026: ओमान की मध्यस्थता में पहले दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता हुई।

जिनेवा इस समय वैश्विक राजनीति का केंद्र बना हुआ है, जहां एक ओर परमाणु वार्ता चल रही है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन प्रतिनिधियों के बीच भी अलग सत्र प्रस्तावित है।