एक ऐसा मंदिर जहां भूतों को दी जाती है थर्ड डिग्री, क्या जानते हैं आप

नई दिल्ली: आपको जानकर हैरानी होगी कि मेहंदीपुर के बालाजी मंदिर में किसी व्यक्ति के शरीर को छोड़ने के लिए भूत, प्रेत या बुरी आत्मा को दी गई यह तीसरी डिग्री किसी भी तरह का शारीरिक उत्पीड़न नहीं है बल्कि हनुमान जी के नाम का जाप किया जाता है। जब लोग डॉक्टर और विज्ञान से तमाम तरह के उपाय करने के बाद भी हार मान लेते हैं तो वे राजस्थान के मेहंदीपुर स्थित बालाजी की शरण में आ जाते हैं और कहा जाता है कि जिसने भी यहां आकर इसके लिए आवेदन किया, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा। मंदिर में बजरंगबली का बाल रूप स्वयंभू है। इस मूर्ति की छाती के बाईं ओर एक बहुत ही सूक्ष्म छेद है, जिसके माध्यम से पवित्र जल की धारा लगातार बहती रहती है। भक्त इस जल को चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

बालाजी के मंदिर में प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान भैरव की मूर्तियां भी हैं। मंदिर में बड़ी संख्या में ऊपरी रुकावट से पीड़ित लोग अजीबोगरीब हरकतें करते नजर आते हैं, जिसे यहां पेशी आना कहते हैं। मंदिर परिसर में दिन-रात बालाजी के जयकारों को इन लोगों का इलाज करते देखा जा सकता है।

पूरा मंजर इतना हैरान करने वाला है कि मानो किसी अपराधी को थर्ड डिग्री दी जा रही हो और वह रहम की भीख मांग रहा हो। कई लोग आते ही बेहोश भी हो जाते हैं। बुंदेलखंड से आए दीपक सोनी ने बताया कि वह यहां 25-30 साल से आ रहे हैं। दीपक ने कहा, एक साल भी ऐसा नहीं बीता जब बाबा के चमत्कार का प्रत्यक्ष अनुभव न हुआ हो। इसी तरह, अनूप मोदी कहते हैं, दिल्ली की दवा खो जाने पर परिवार और दोस्तों से जुड़े कई मामले हैं, लेकिन चमत्कारी रूप से लोग यहां आते ही ठीक हो गए।

मेहंदीपुर बालाजी धाम इसलिए भी अनोखा है क्योंकि अन्य मंदिरों के विपरीत न तो प्रसाद चढ़ाया जाता है और न ही भक्त किसी भी प्रकार का प्रसाद अपने घरों में ले जा सकते हैं। हाजिरी लगाने या याचना करने के नाम पर पांच रुपये में मिलने वाले छोटे-छोटे लड्डू जरूर चढ़ाए जाते हैं, हालांकि कोई भी भक्त उन्हें अपने हाथों से किसी मूर्ति को नहीं चढ़ा सकता.

मंदिर से जुड़ा एक खास नियम यह भी है कि यहां से लौटने पर आप अपने साथ कोई भी खाना-पीना घर नहीं ले जा सकते। दरअसल आस्था के सामने न तर्क आता है और न तर्क। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर आज भी देश में व्याप्त अंधविश्वास की जीवंत बानगी पेश करता है।