‘वायु योद्धाओं’ ने 222 उड़ानें भरकर 388 घंटे गुजारे आसमान में, इन देशों से ऑक्सीजन कंटेनर किए एयरलिफ्ट

देश को ऑक्सीजन संकट से उबारने के लिए 'वायु योद्धा' अपने आदर्श वाक्य 'हर काम-देश के नाम' को सार्थक करते हुए 24 घंटे देश-विदेश की उड़ान भर रहे हैं।

नई दिल्ली। देश को ऑक्सीजन संकट से उबारने के लिए ‘वायु योद्धा’ अपने आदर्श वाक्य ‘हर काम-देश के नाम’ को सार्थक करते हुए 24 घंटे देश-विदेश की उड़ान भर रहे हैं। वायुसेना के परिवहन विमानों ने अबतक सिंगापुर, थाईलैंड, दुबई, फ्रैंकफर्ट, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों तक 222 उड़ानें भरी हैं। करीब 388 घंटे की उड़ानों में वायुसेना ने 184 से ज्यादा ऑक्सीजन कंटेनर एयरलिफ्ट किये हैं। वायुसेना ने 60 से अधिक विमानों और हेलीकॉप्टरों को ‘कोविड टास्क’ पर लगाया है। भारतीय वायुसेना के कई विमान मंगलवार तड़के यूनाइटेड किंगडम से 450 ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ चेन्नई, तमिलनाडु पहुंचे।
INDIAN AIR FORCE

60 से अधिक परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर देश-विदेश की उड़ान भर रहे

भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े को 24 घंटे की तत्परता के साथ कोविड-19 की दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिए तैनात किया गया है। इस समय वायुसेना के 60 से अधिक परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर देश-विदेश की उड़ान भर रहे हैं। प्रवक्ता के मुताबिक 8 सी-17 ग्लोब मास्टर, चार आईएल-76, आठ सी-130 हरक्युलिस, 20 एएन-32, एक डीओ-228 डोर्नियर विमान और 20 हेलीकॉप्टरों को कोविड टास्क पर लगाया गया है। अबतक इन विमानों ने कुल 222 उड़ानें भरी हैं जिनमें 192 घरेलू और 30 विदेशी हैं। इस तरह वायुसेना के विमान 388 घंटे हवा में रहे जिसमें 269 घंटे घरेलू और 119 घंटे इंटरनेशनल उड़ानों में गुजारे हैं। 

लड़ाकू क्षमता को बनाए रखने के लिए भी कड़े कदम उठाए

वायुसेना ने ‘कोविड टास्क’ पर व्यस्त रहने के बावजूद अपनी लड़ाकू क्षमता को बनाए रखने के लिए भी कड़े कदम उठाए हैं।परिचालन चालक दल और कोविड कार्यों में शामिल सभी कर्मियों के बीच अलगाव और अलगाव संबंधी सावधानियों को रोकने के लिए विशेष ध्यान रखा गया है।
मिशन पर तैनात करने से पहले ही वायु योद्धाओं में से 98% को पहली खुराक और 85% को दूसरी खुराक का टीका लगाया गया है। जल्द से जल्द 100% वायु योद्धाओं का टीकाकरण किये जाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। वायुसेना में अब तक सिर्फ 1% कोविड के सक्रिय मामले मिले हैं। अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए मजबूत उपाय भी किए गए हैं।

अभी भी प्रयास जारी

वायुसेना के अनुसार अबतक सिंगापुर, थाईलैंड, दुबई, फ्रैंकफर्ट, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों से ऑक्सीजन कंटेनर एयरलिफ्ट किये हैं। सी-17 ग्लोब मास्टर विमानों ने सिंगापुर से पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयरबेस तक 08 क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट किया। 
वायु सेना का कहना है कि अभी भी प्रयास जारी हैं और सभी आवश्यकताओं को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। सी-17 ग्लोबमास्टर वायु सेना स्टेशन हिंडन से फ्रैंकफर्ट के लिए उड़ान भरकर वहां से 4 क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों के साथ वापस आ गया है। इसके अलावा दूसरे सी-17 ने हिंडन से जर्मनी तक 12 घंटे की निरंतर उड़ान भरकर 04 क्रायोजेनिक कंटेनरों के साथ वापस आ गया है। भारतीय वायुसेना के विमान आज तड़के यूनाइटेड किंगडम से 450 ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ चेन्नई, तमिलनाडु पहुंचे।

134 ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट करके देश के भीतर ही इधर से उधर पहुंचाया

वायुसेना के विमानों ने इसके अलावा 134 ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट करके देश के भीतर ही इधर से उधर पहुंचाया है। इसी का नतीजा है कि देश के प्रमुख स्थानों पर 126 ऑक्सीजन टैंकरों को तैनात कर दिया गया है। सी-17 ने चंडीगढ़ से भुवनेश्वर दो कंटेनर, एक को बड़ौदा से रांची, दो को ग्वालियर से रायपुर, दो को मुंबई से भुवनेश्वर पहुंचाए हैं।
आगरा से रांची के लिए दो, इंदौर से सूरत के लिए दो, चंडीगढ़ से रांची के लिए दो और हिंडन से रांची तक छह क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट किया गया है। इसके अलावा आईएल-76 ने दिल्ली से दीमापुर तक तीन ऑक्सीजन प्लांट उपकरण और लखनऊ के कोविड अस्पताल की स्थापना के लिए दीमापुर से बख्शी का तालाब तक 90 मेडिकोज के साथ 11.5 टन का एक सेना भार भी उठाया है। देश में ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों के लिए ऑक्सीजन कंटेनर, चिकित्सा कर्मियों और उपकरणों का एयरलिफ्ट 24×7 ऑपरेशन के माध्यम से जारी है।

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