क्या शनि देव को तेल चढ़ाते समय आप ये 5 गलतियां कर रहे हैं? पूजा का फल नहीं मिलेगा!
हमारे पूर्वजों ने अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा के लिए खास दिन तय किए थे। इसी के अनुसार, हम खास देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए मंदिरों में जाते हैं और उनकी पसंदीदा चीज़ें चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। इसी तरह, शनिवार को भगवान शनि के मंदिर जाकर तेल चढ़ाने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। लेकिन, सही जानकारी न होने के कारण लोग अक्सर तेल चढ़ाते समय छोटी-छोटी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता।
सनातन धर्म में शनिवार का दिन भगवान शनि की पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शनि को तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की परेशानियाँ, बाधाएँ और नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। यह उपाय उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है जो *शनि की साढ़े साती* या *ढैया* (शनि से जुड़े ज्योतिष के कठिन दौर) से गुज़र रहे हैं या जिनकी कुंडली में शनि का प्रभाव कमज़ोर है। काले तिल या तिल के तेल से देवता का *अभिषेक* (स्नान) करने से कष्टों से राहत मिलती है।
हालाँकि, भगवान शनि को तेल चढ़ाते समय कुछ खास नियमों का पालन करना ज़रूरी है ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके। नियम इस प्रकार हैं:
भगवान शनि को तेल चढ़ाने के सही नियम
लोहे के बर्तन का इस्तेमाल करें: भगवान शनि को तेल चढ़ाते समय हमेशा लोहे के बर्तन (या पात्र) का इस्तेमाल करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोहा धातु का सीधा संबंध शनि ग्रह से है।
सीधे मूर्ति पर तेल न डालें: सबसे ज़रूरी सावधानी यह है कि भगवान शनि की मूर्ति पर सीधे तेल न डाला जाए। इसके बजाय, तेल का दीपक जलाकर या देवता के सामने रखे खास बर्तन में तेल डालकर पूजा करें।
शनि शिला (पत्थर की शिला) पर तेल चढ़ाएँ: अगर मंदिर में शनि *शिला* है (जैसे शनि शिंगणापुर में है), तो उस पर तेल चढ़ाना ज़्यादा शुभ और फलदायी माना जाता है।
अपनी नज़रें उनके चरणों पर टिकाए रखें: देवता के दर्शन करते समय एक खास नियम का पालन करना चाहिए... अपनी नज़रें हमेशा भगवान शनि के चरणों पर टिकाए रखें; उनसे सीधी नज़रें मिलाने से बचें।
इन नियमों का पालन करते हुए भगवान शनि को तेल चढ़ाने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है।