सावन में घर ले आएं ये 5 जादुई पौधे, खिंची चली आएगी सुख-समृद्धि
सावन का पवित्र महीना वर्षा ऋतु के आगमन के साथ शुरू होता है और इसे नए पौधे लगाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान लगाए गए कुछ विशेष पौधे घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ज्योतिषविद् पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यदि इन पौधों को सही दिशा और नियमों के अनुसार लगाया जाए, तो जीवन की कई परेशानियों से राहत मिल सकती है।
तुलसी का पौधा
सनातन परंपरा में सबसे पवित्र पौधों में से एक माना जाता है। सावन या कार्तिक में इसे लगाने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, परिवार का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसे घर के आंगन या बीच के भाग में लगाना शुभ माना जाता है। प्रतिदिन शाम को तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से विशेष लाभ मिलता है। वहीं सुबह खाली पेट तुलसी के पत्तों का सेवन करने से बुद्धि, वाणी और मानसिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ संतान संबंधी समस्याओं में भी राहत मिलने की मान्यता है।
केले का पौधा
सावन में विशेष रूप से एकादशी या गुरुवार को लगाना शुभ माना जाता है। इसे घर के पीछे लगाना चाहिए, मुख्य द्वार के सामने नहीं। इसकी नियमित पूजा और जल अर्पित करने से दांपत्य जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है, जिससे विवाह में आ रही रुकावटें कम होती हैं और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
अनार का पौधा
घर को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और तंत्र-मंत्र के प्रभावों से बचाने वाला माना जाता है। इसे मुख्य द्वार से थोड़ी दूरी पर लगाना उचित बताया गया है। मान्यता है कि यदि लंबे समय से कोई गंभीर परेशानी चल रही हो, तो अनार के फूल को शहद में डुबोकर बहते जल में प्रवाहित करने से कष्टों में कमी आती है।
शमी का पौधा
शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और शनि दोष को शांत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सावन के किसी भी शनिवार की शाम मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना चाहिए। शनिवार को इसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। वहीं विजयादशमी के दिन इसकी पूजा करने से धन-धान्य और समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है।
पीपल का वृक्ष
अत्यंत पूजनीय है, लेकिन इसे घर के भीतर नहीं लगाना चाहिए। सावन में गुरुवार या शनिवार को इसे सड़क किनारे, पार्क या किसी सार्वजनिक स्थान पर लगाना शुभ माना जाता है। नियमित पूजा और परिक्रमा से संतान सुख, मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली की प्राप्ति होती है। शनिवार की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि ग्रह की स्थिति अनुकूल होने की मान्यता है।