FSSAI का बड़ा अलर्ट; घर पर ऐसे करें असली और नकली तेल की पहचान, वरना पछताएंगे

FSSAI का बड़ा अलर्ट; घर पर ऐसे करें असली और नकली तेल की पहचान, वरना पछताएंगे

भारतीय रसोई में सरसों का तेल सबसे अहम हिस्सा है। सब्जी छौंकने से लेकर अचार बनाने तक हर जगह इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तेल को आप सेहतमंद समझकर खा रहे हैं, वह आपके परिवार के लिए धीमा जहर हो सकता है?

झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। यहां मिलावटी सरसों का तेल खाने से एक ही परिवार के 6 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। जांच में पता चला कि तेल में एक बेहद खतरनाक जंगली पौधे के बीजों की मिलावट की गई थी, जिसने 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' जैसी जानलेवा बीमारी को जन्म दिया। आइए जानते हैं कि आखिर आपके किचन तक पहुंचने वाले तेल में यह जहर कैसे मिल रहा है और आप इससे अपने परिवार को कैसे बचा सकते हैं।

सरसों के तेल में कैसे मिल रहा है मौत का सामान?

अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तेल मशीन से छनकर आता है, तो उसमें मिलावट कैसे हो सकती है। दरअसल, असली खेल तेल निकालने की प्रक्रिया से पहले ही शुरू हो जाता है। मुनाफाखोर सरसों के बीजों के साथ एक खास किस्म के जहरीले बीज मिला देते हैं। मशीन के भारी दबाव से जब तेल निकाला जाता है, तो सरसों के साथ-साथ इन जहरीले बीजों का अर्क भी तेल में पूरी तरह घुल जाता है। इसे छानने के बाद भी इस खतरनाक केमिकल को अलग नहीं किया जा सकता।

क्या है 'सत्यानाशी' (आर्जेमोन मेक्सिकाना) जिसने ली 6 जानें?

पलामू के जिस परिवार ने जान गंवाई, उनके घर में इस्तेमाल होने वाले तेल में 'आर्जेमोन ऑयल' की पुष्टि हुई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSAI) 2006 के तहत आर्जेमोन को इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना गया है।

आर्जेमोन मेक्सिकाना, जिसे बोलचाल की भाषा में 'सत्यानाशी' कहा जाता है, एक कांटेदार जंगली पौधा है। इसके बीज बिल्कुल सरसों के दानों जैसे दिखते हैं, लेकिन आकार में हल्के से बड़े होते हैं। जब इन बीजों का तेल सरसों के तेल में मिलता है, तो उसमें 'सैंग्विनारिन' नाम का जानलेवा केमिकल पैदा होता है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर 200 लीटर शुद्ध सरसों के तेल में आर्जेमोन की सिर्फ दो बूंदें भी गिर जाएं, तो यह पूरे तेल को जहरीला बना देता है। इसे खाने से 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' होती है, जिससे नसों में ब्लॉकेज, पैरों में भारी सूजन और अंततः हार्ट या किडनी फेल होने से मौत हो जाती है।

FSSAI का अलर्ट: ऐसे करें असली और नकली तेल की वैज्ञानिक पहचान

बाजार में मौजूद मिलावटी तेल से बचने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक आसान केमिकल टेस्ट बताया है:

  • एक टेस्ट ट्यूब में 5 मिलीलीटर सरसों का तेल लें।

  • उसमें ठीक 5 मिलीलीटर नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) मिलाएं।

  • अब ट्यूब को हल्के हाथों से हिलाएं।

  • नतीजा: अगर तेल का रंग जस का तस रहता है, तो आपका तेल 100% शुद्ध है। लेकिन अगर तेल का रंग लाल या हरा हो जाए, तो समझ लें कि उसमें आर्जेमोन की मिलावट है। (नोट: नाइट्रिक एसिड खतरनाक होता है, इसलिए यह जांच किसी प्रोफेशनल लैब या पूरी सावधानी के साथ ही करें।)

रंग और गंध (Smell) से घर पर कैसे पकड़ें मिलावट?

अगर आप केमिकल टेस्ट नहीं कर सकते, तो अपनी आंखों और नाक का इस्तेमाल करें।

  • रंग देखें: शुद्ध सरसों के तेल का रंग हल्का पीला या गहरा पीला और पूरी तरह पारदर्शी होता है। वहीं, मिलावटी तेल हल्का भूरा या लाल रंग का दिखाई दे सकता है।

  • सुगंध पहचानें: असली सरसों के तेल की महक बहुत तेज और तीखी (Pungent) होती है, जो नाक में झनझनाहट पैदा करती है। अगर आपके तेल में गंध बहुत हल्की है या बिल्कुल नहीं है, तो तुरंत उसका इस्तेमाल बंद कर दें।

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