पतले होने की चाहत में प्रोटीन छोड़ा? फायदे की जगह शरीर को हो सकता है 'परमानेंट' नुकसान!
आजकल वजन घटाने की होड़ में लोग कड़ी एक्सरसाइज के साथ डाइट में सख्त बदलाव करते हैं, मगर कई बार अनजाने में प्रोटीन का सेवन भी एकदम कम कर देते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो यह तरीका आपकी सेहत को फायदे की जगह बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुपम बिस्वास का कहना है कि सिर्फ खाना कम करना वजन घटाने का सही रास्ता नहीं है, बल्कि इस पूरे सफर में प्रोटीन सबसे अहम स्तंभ का काम करता है।
मांसपेशियों को नुकसान होने से ऐसे बचाएं
डॉ. बिस्वास के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति वजन घटाने के लिए तेजी से कैलोरी इनटेक घटाता है, तो शरीर ऊर्जा की पूर्ति के लिए चर्बी (फैट) के साथ-साथ मांसपेशियों (मसल्स) को भी ईंधन की तरह इस्तेमाल करने लगता है। डाइट में भरपूर प्रोटीन मौजूद रहने से मांसपेशियों का यह नुकसान रुकता है, जिससे शरीर सुडौल रहता है और कमजोरी नहीं आती। इसके अलावा प्रोटीन शरीर के मेटाबॉलिज्म को लगातार एक्टिव रखता है, जिससे फैट बर्न की रफ्तार धीमी नहीं पड़ती।
वजन प्रबंधन में प्रोटीन के महत्व को वैज्ञानिक भाषा में 'थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड' (TEF) से समझा जा सकता है। कार्बोहाइड्रेट या फैट के मुकाबले प्रोटीन को पचाने और प्रोसेस करने में शरीर को काफी अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे खुद-ब-खुद अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है। साथ ही, प्रोटीन युक्त भोजन करने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है। यह भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन को शांत रखकर बार-बार होने वाली अनहेल्दी क्रेविंग्स और ओवरईटिंग पर ब्रेक लगाता है। जब इसे फाइबर युक्त चीजों के साथ लिया जाए, तो यह ब्लड शुगर को स्पाइक होने से रोककर इंसुलिन लेवल को संतुलित रखता है।
एंडोक्राइनोलॉजी के नजरिए से समझें तो मोटापा सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से जुड़ा होता है। ऐसे में हार्मोन्स का संतुलन बनाए रखने के लिए भूखे रहने के बजाय पोषण से भरपूर डाइट लेना जरूरी है। सामान्य तौर पर एक स्वस्थ वयस्क को अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन की रोजाना जरूरत होती है, वहीं वजन घटाने और हैवी वर्कआउट करने वालों के लिए यह मात्रा और बढ़ सकती है। अपनी थाली में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए दालें, पनीर, दूध, दही, सोयाबीन, टोफू और ड्राई फ्रूट्स को नियमित रूप से शामिल किया जा सकता है।