उत्तर-पूर्व की बालकनी में ये सामान रखा तो रुक सकती है धन की राह!
दिनभर की भागदौड़ के बाद बालकनी में बिताए कुछ पल मन को सुकून देते हैं। यह स्थान सिर्फ खुली हवा लेने का साधन नहीं है बल्कि घर के भीतर आने वाली ऊर्जा का मुख्य केंद्र भी है।
ऊर्जा विज्ञान और वास्तु शास्त्र के जानकारों के अनुसार घर के इस महत्वपूर्ण हिस्से का सीधा ताल्लुक आपकी प्रगति और मानसिक शांति से जुड़ा होता है। अगर यहां गलत वस्तुएं जमा हो जाएं तो इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर दिखने लगता है। आइए समझते हैं कि बालकनी को व्यवस्थित रखते हुए किन चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है।
कैक्टस और नुकीले पौधों से बनाएं दूरी
सजावट के नाम पर अक्सर लोग बालकनी में कैक्टस या नुकीले पत्तों वाले पौधे लगा लेते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पौधे वातावरण में तनाव और चुभन पैदा करते हैं। इनकी मौजूदगी से घर के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ने लगता है और बेवजह के विवाद खड़े होते हैं। पैसों की आवक पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। हरियाली के लिए मनी प्लांट या तुलसी जैसे शुभ पौधे लगाना बेहतर विकल्प साबित होता है।
जूते चप्पलों का ढेर रोकना जरूरी
अक्सर जगह की कमी के चलते लोग बालकनी के कोने में शू-रैक बना देते हैं या पुराने जूते-चप्पल रख छोड़ते हैं। यह आदत घर के मुख्य प्रवाह में रुकावट डालती है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह स्थिति शनि और राहु-केतु के दुष्प्रभावों को सक्रिय कर सकती है जिससे कामकाज और आजीविका के क्षेत्र में अचानक अड़चनें आने लगती हैं।
कबाड़ और टूटे सामान का जमावड़ा न बनने दें
घरों में अक्सर अनुपयोगी या खंडित सामग्री को बालकनी में स्टोर रूम की तरह फेंक दिया जाता है। यह लापरवाही घर में अवसाद और भ्रम की स्थिति पैदा करती है। टूटी हुई वस्तुएं राहु के नकारात्मक असर को बढ़ावा देती हैं जिससे बनते काम भी अंतिम समय में अटक सकते हैं। परिवार के मानसिक सुकून के लिए जरूरी है कि ऐसा कबाड़ तुरंत घर से बाहर किया जाए।
वजनदार फर्नीचर रखने से बचें
बालकनी को आरामदेह बनाने के लिए भारी भरकम सोफे या लकड़ी की मेज रखने से बचना चाहिए। विशेष रूप से उत्तर और पूर्व दिशा को जितना खुला और हल्का रखा जाए उतना ही धन का प्रवाह सहज बना रहता है। इस हिस्से में जरूरत से ज्यादा वजन होने से आर्थिक तंगी और आय में मंदी का सामना करना पड़ सकता है।