घर को कांच से सजाने से पहले जान लें ये 7 वास्तु नियम, वरना बिगड़ सकता है माहौल
मॉडर्न होम डेकोर और लग्जरी लाइफस्टाइल की दौड़ में आज लगभग हर घर में कांच की चीजों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। डाइनिंग टेबल, क्रॉकरी सेट्स, डिजाइनर शोपीस, ग्लास पार्टिशन से लेकर बड़े-बड़े वॉल मिरर्स तक कांच हर कमरे की सजावट का मुख्य आकर्षण बन चुके हैं।
शीशे की यह चमक देखने में जितनी खूबसूरत और आधुनिक लगती है, वास्तु शास्त्र के नजरिए से उतनी ही संवेदनशील मानी जाती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर के भीतर जरूरत से ज्यादा कांच का उपयोग सकारात्मक ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़कर पारिवारिक माहौल को अशांत कर सकता है। अगर आप भी अपने आशियाने को कांच से सजा रहे हैं, तो इसके रख-रखाव और सही प्लेसमेंट से जुड़े इन नियमों की अनदेखी बिल्कुल न करें।
घर में जरूरत से ज्यादा कांच बढ़ा सकता है मानसिक अस्थिरता
वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के मुताबिक घर के हर कोने में अंधाधुंध शीशे या कांच का इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता है। सजावट के लिए सीमित मात्रा में सुंदर शोपीस रखना ठीक है, लेकिन उनकी संख्या और सटीक दिशा का संतुलन साधना बेहद जरूरी है। घर में जरूरत से ज्यादा कांच होने से वातावरण में एनर्जी का फ्लो असंतुलित और अस्थिर हो जाता है। इसका सीधा असर घर के सदस्यों के स्वभाव पर पड़ता है, जिससे परिवार में आए दिन छोटी-छोटी बातों को लेकर गलतफहमी, चिड़चिड़ापन और आपसी तकरार बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।
रोजमर्रा में कांच के बर्तनों के बजाय अन्य धातुओं को दें प्राथमिकता
कांच की कटोरी, प्लेट और डिनर सेट्स दिखने में काफी क्लासी और आकर्षक लगते हैं, इसलिए कई घरों में नियमित भोजन परोसने के लिए इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि वास्तु के नियम रोजमर्रा के खान-पान में लगातार कांच के बर्तन इस्तेमाल करने से बचने की सलाह देते हैं। भोजन करने के लिए पीतल, कांसा, स्टील या अन्य पारंपरिक धातुओं और सामान्य बर्तनों का उपयोग स्वास्थ्य और ऊर्जा दोनों लिहाज से श्रेष्ठ माना गया है। कांच के नाजुक बर्तनों को केवल त्योहारों या खास पारिवारिक मौकों तक सीमित रखना ही समझदारी है।
बेडरूम में आईना लगाते समय रखें खास सावधानी
वास्तु शास्त्र में दर्पण यानी आईने को ऊर्जा परावर्तित करने वाला सबसे शक्तिशाली माध्यम माना गया है, इसलिए इसकी सही दिशा पर विशेष जोर दिया जाता है। बेडरूम में आईना लगाते समय सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। मान्यता है कि सोते समय यदि शरीर का कोई भी हिस्सा या पूरे बिस्तर का सीधा प्रतिबिंब आईने में झलकता है, तो इससे दांपत्य जीवन में तनाव और कमरे की शांति भंग हो सकती है। यदि बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल या दर्पण रखना मजबूरी हो, तो उसे ऐसी जगह लगाएं जहां से बेड का सीधा अक्स न दिखे, या फिर रात को सोते समय उस पर पर्दा डाल दें।
सुबह आंख खुलते ही आईना देखने से बचें
अक्सर लोगों की आदत होती है कि वे सुबह सोकर उठते ही सबसे पहले ड्रेसिंग टेबल या आईने के सामने जाकर अपना चेहरा देखते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार सुबह उठते ही सबसे पहले शीशे में अपनी सूरत देखना ऊर्जा के स्तर को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि दर्पण भावनाओं और पिछली रात की अवचेतन ऊर्जा का प्रतिबिंब माना जाता है। सुबह बिस्तर छोड़ते ही अपने इष्ट देव का ध्यान करना चाहिए, हथेलियों के दर्शन करने चाहिए और कुछ पल शांत मन से बैठकर सकारात्मक विचार लाने चाहिए, इसके बाद ही दिनचर्या शुरू करनी चाहिए।
ग्लास टॉप वर्क टेबल पर लंबे समय तक काम करने से घटती है एकाग्रता
आजकल कॉर्पोरेट दफ्तरों और घरों के स्टडी रूम में ट्रांसपेरेंट ग्लास टेबल का चलन काफी बढ़ गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार लंबे समय तक पूरी तरह पारदर्शी कांच की मेज पर बैठकर काम करना या पढ़ाई करना अनुकूल नहीं माना जाता। पारदर्शी सतह नीचे के खालीपन को दर्शाती है, जिससे मन में स्थिरता और ठहराव की भावना कमजोर पड़ने लगती है। अगर काम या पढ़ाई के दौरान एकाग्रता बनाए रखने में मुश्किल आ रही हो या निर्णय लेने में संशय बना रहता हो, तो मजबूत लकड़ी या ठोस सतह वाली टेबल का चयन करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।
टूटा या चटका हुआ कांच तुरंत घर से बाहर निकालें
घर में अगर किसी कांच के बर्तन, खिड़की, शोपीस या आईने में हल्की सी भी दरार आ जाए या कोना टूट जाए, तो उसे मोहवश घर में संभालकर कभी नहीं रखना चाहिए। वास्तु में चटके और टूटे हुए कांच को नकारात्मक ऊर्जा (निगेटिव एनर्जी) को तेजी से खींचने वाला माना जाता है। इसके अलावा व्यावहारिक दृष्टि से भी टूटा कांच घर में कभी भी गंभीर चोट या दुर्घटना का कारण बन सकता है। किसी भी वस्तु के टूटते ही उसे सावधानीपूर्वक हटाकर सुरक्षित तरीके से फेंक देना चाहिए और उसकी जगह नई व साबुत वस्तु रखनी चाहिए।
कांच के सामान पर न जमने दें धूल और उंगलियों के निशान
कांच की सतह पर धूल-मिट्टी, पानी के छींटे और हाथों की उंगलियों के निशान बहुत तेजी से उभर आते हैं। वास्तु शास्त्र में साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर को सीधे सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। अगर घर में रखी कांच की मेज, खिड़कियां या आईने गंदे, धुंधले और दाग-धब्बों से भरे रहेंगे, तो यह पूरे घर के डेकोर और वहां के सकारात्मक माहौल पर बुरा असर डालते हैं। इसलिए कांच की चीजों को रोजाना सूखे कपड़े या क्लीनर से चमकाकर साफ रखना बेहद जरूरी है।
खुशहाल जीवन के लिए जरूरी है सही संतुलन
कांच अपने आप में पूरी तरह अशुभ या शुभ नहीं होता, बल्कि उसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उसे किस दिशा, जगह और किस रूप में रखा है। घर में किसी भी चीज का चयन जरूरत, उपयोगिता और वास्तु के संतुलन के आधार पर होना चाहिए। यदि आपको कांच के इंटीरियर से लगाव है, तो इसे पूरी तरह हटाने की आवश्यकता नहीं है; बस बेडरूम में सही दिशा का चुनाव करें, सफाई का ध्यान रखें और टूटी-फूटी चीजों को तुरंत हटाकर घर में सुख, शांति और सकारात्मकता बनाए रखें।