कभी 30% तक सिमटी थी भर्ती, अब 70%! सिख रेजिमेंट के लिए पंजाब से आई बड़ी खुशखबरी

कभी 30% तक सिमटी थी भर्ती, अब 70%! सिख रेजिमेंट के लिए पंजाब से आई बड़ी खुशखबरी

साल 2022 में सेना में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद सिख रेजिमेंट में भर्ती की संख्या में भारी कमी देखी गई थी, लेकिन अब जमीनी हालात में तेजी से सकारात्मक बदलाव आ रहा है। सेना द्वारा पंजाब के युवाओं को प्रेरित करने और भर्ती बढ़ाने के लिए चलाए गए विशेष अभियानों के नतीजे अब सामने आने लगे हैं।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सिख रेजिमेंट की कुल रिक्तियों में से केवल 30 प्रतिशत पद ही भरे जा सके थे, जबकि 2025-26 में यह ग्राफ उल्लेखनीय उछाल के साथ लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पिछले माह पंजाब के मुख्यमंत्री और सेना प्रमुख के बीच संपन्न हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी राज्य से सैन्य भर्ती बढ़ाने के उपायों और चार साल बाद सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों के भविष्य के रोजगार के विकल्पों पर व्यापक चर्चा की गई थी।

गांव-गांव पहुंचे सैन्य अफसर, सरपंचों और युवाओं से साधा सीधा संवाद

भर्ती के गिरते आंकड़ों को सुधारने के लिए सिख रेजिमेंटल सेंटर, शीर्ष सैन्य कमान, ग्राउंड यूनिट्स और पूर्व सैनिकों के नेटवर्क ने एक समन्वित रणनीति तैयार की। रेजिमेंट के विशेष दलों ने न केवल भर्ती रैलियों के स्थलों का दौरा किया, बल्कि सीधे गांवों का रुख कर पंचायतों और सरपंचों को इस मुहिम से जोड़ा। सैन्य अधिकारियों ने स्थानीय युवाओं और उनके परिवारों से रूबरू होकर अग्निपथ योजना के फायदों की जानकारी दी, फैली भ्रांतियों को दूर किया और उन्हें भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

सिख, सिख लाइट इन्फैंट्री और पंजाब रेजिमेंट का स्वरूप

भारतीय सेना में सिख रेजिमेंट, सिख लाइट इन्फैंट्री और पंजाब रेजिमेंट तीनों में ही करीब 20-20 नियमित बटालियनें हैं, जिनके साथ राष्ट्रीय राइफल्स और प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) की कई इकाइयां भी जुड़ी हुई हैं। इन सभी विंग्स में जवानों की बड़ी संख्या पंजाब से आती है। इसके अलावा सेना की तकनीकी और सहायक सेवाओं में भी राज्य के युवा अपनी सेवाएं देते हैं। पंजाब से हर साल लगभग 8,000 सैनिकों की भर्ती का कोटा बनता है, जो सेवानिवृत्ति और सेवामुक्ति के आधार पर समय-समय पर बदलता रहता है।

पूर्व सैन्य अधिकारियों का विश्लेषण: क्यों आई थी भर्ती में गिरावट?

सिख रेजिमेंट के पूर्व कर्नल लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. सुजलाना (सेवानिवृत्त) के अनुसार, अन्य सैन्य इकाइयों के मुकाबले भर्ती की सबसे बड़ी चुनौती विशेष रूप से सिख रेजिमेंट के सामने आई थी। सैन्य संरचना के लिहाज से सिख रेजिमेंट में मुख्य रूप से ऊंची जातियों के सिख शामिल होते हैं, जबकि सिख लाइट इन्फैंट्री में रामदासिया व मजहबी सिख समुदाय और पंजाब रेजिमेंट में हिंदू, सिख तथा मुस्लिम तीनों वर्गों के जवान सेवाएं देते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल सुजलाना ने स्पष्ट किया कि अग्निपथ स्कीम को लेकर फैलाई गई नकारात्मकता, चार वर्ष बाद करियर की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की बढ़ती होड़ इस गिरावट की प्रमुख वजहें रहीं।

1846 से शुरू हुआ 180 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

सिख रेजिमेंट का इतिहास करीब 180 साल पुराना है, जिसकी औपचारिक नींव अगस्त 1846 में रखी गई थी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिख साम्राज्य के आंशिक विलय से ठीक पहले इसकी पहली बटालियन गठित की थी, जिसके बाद बंगाल सेना में सिख लड़ाकों को शामिल करने का सिलसिला शुरू हुआ। कालक्रम में यह रेजिमेंट देश-विदेश के कई बड़े युद्ध अभियानों का मुख्य हिस्सा बनी। इसने नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, यूरोप और चीन के रणक्षेत्रों में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। 1947 में आजादी मिलने के बाद भी भारतीय सेना द्वारा लड़े गए प्रत्येक बड़े युद्ध और अभियान में रेजिमेंट ने अग्रणी भूमिका निभाई।