कंगाली के बीच पाकिस्तान में नशे की नई सनक: बिच्छुओं को पीसकर धुआं उड़ा रहे लोग, दिमाग को सुन्न करने वाला ये ट्रेंड है बेहद खतरनाक

कंगाली के बीच पाकिस्तान में नशे की नई सनक: बिच्छुओं को पीसकर धुआं उड़ा रहे लोग, दिमाग को सुन्न करने वाला ये ट्रेंड है बेहद खतरनाक

आर्थिक बदहाली, भारी कर्ज और महंगाई की मार झेल रहा पाकिस्तान इन दिनों एक बेहद अजीबोगरीब और आत्मघाती संकट की गिरफ्त में है। पाकिस्तान के युवाओं और नशेड़ियों के बीच इन दिनों 'बिच्छू का नशा' (Scorpion Smoking) करने की एक नई और खौफनाक लत तेजी से पैर पसार रही है। पारंपरिक और महंगे नशीले पदार्थों की पहुंच से दूर हो चुके लोग अब जहरीले बिच्छुओं को मारकर और उन्हें पीसकर धुएं के रूप में उड़ा रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा से सटे इलाकों से शुरू हुआ यह ट्रेंड अब पूरे मुल्क के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

कैसे तैयार होता है बिच्छू का यह जानलेवा नशा?

हैरान करने वाली बात यह है कि इस जानलेवा नशे को तैयार करने के लिए एक बेहद जटिल और खतरनाक प्रक्रिया अपनाई जाती है। नशेड़ी सबसे पहले जहरीले बिच्छुओं (विशेषकर काले और पीले बिच्छुओं) को पकड़ते हैं और उन्हें कई दिनों तक तेज धूप में सुखाते हैं। इसके बाद मरे हुए सूखे बिच्छू को पीसकर उसका बारीक पाउडर बना लिया जाता है। कुछ लोग इसे सीधे चिलम या सिगरेट के पेपर में रोल करके फूंकते हैं, तो कुछ उतावले लोग बिच्छू को सीधे तवे पर भूनकर या आग में जलाकर उसके धुएं को पाइप के जरिए सीधे अपने फेफड़ों तक खींचते हैं। इस नशे में बिच्छू की जहरीली पूंछ (डंक वाला हिस्सा) की मांग सबसे ज्यादा होती है।

10 घंटे का ऐसा 'ट्रिप' जो इंसान को कर देता है बेसुध

नशा करने वाले लोगों और जानकारों के मुताबिक, बिच्छू के जहर का धुआं शरीर के अंदर जाते ही दिमाग पर सीधा और गहरा प्रहार करता है। यह नशा इंसान को करीब 10 से 20 घंटे के लिए एक ऐसी काल्पनिक और भयानक दुनिया (Hallucinations) में ले जाता है, जहां उसे अपने आसपास की कोई सुध नहीं रहती। आंखें घूम जाती हैं, सिर चकराने लगता है और शरीर पूरी तरह से सुन्न हो जाता है। पहली बार इसका सेवन करने वाले कई लोगों ने बताया कि इसके बाद वे घंटों तक बिना वजह चिल्लाते और रोते रहे, क्योंकि उनका अपने दिमाग पर कोई कंट्रोल नहीं रह गया था।

शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना घातक है यह ट्रेंड?

चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने पाकिस्तान में बढ़ते इस ट्रेंड को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। बिच्छू का जहर मूल रूप से एक न्यूरोटॉक्सिन (Neurotoxin) होता है, जो सीधे इंसान के नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ एक बार भी बिच्छू का धुआं अंदर खींचने से इंसान का मानसिक संतुलन हमेशा के लिए बिगड़ सकता है। होश में आने के बाद शरीर में असहनीय दर्द, भयंकर बेचैनी और नींद न आने की गंभीर बीमारी हो जाती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि जहरीली प्रजाति के बिच्छू का इस्तेमाल करने पर फेफड़े तुरंत काम करना बंद कर सकते हैं, जिससे मौके पर ही मौत होने की आशंका 100% तक बनी रहती है।

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