परमाणु ही नहीं इन चीजों में काम में आता है यूरेनियम, जिसे जानकर आप भी कहेंगे- ये तो कमाल है

परमाणु ही नहीं इन चीजों में काम में आता है यूरेनियम, जिसे जानकर आप भी कहेंगे- ये तो कमाल है

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। ऑस्ट्रेलिया से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की सप्लाई मिलने का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। दोनों देशों ने अपने सिविल न्यूक्लियर समझौते (Civil Nuclear Agreement) से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। यह कदम देश की न्यूक्लियर एनर्जी सुरक्षा को एक नई मजबूती देगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि परमाणु हथियारों से अलग यह चमत्कारी ईंधन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को कितना प्रभावित करता है? आइए समझते हैं।

बम ही नहीं इन चीजों में भी काम आता है यूरेनियम

भारत अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ बिजली की भारी किल्लत से जूझ रहा है। ऐसे में यूरेनियम देश के लिए गेमचेंजर साबित होगा। न्यूक्लियर पावर प्लांट में यह मुख्य ईंधन के रूप में काम करता है। सबसे खास बात यह है कि न्यूक्लियर एनर्जी से बिजली बनाते समय न के बराबर कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए सबसे मुफीद है। इसकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि मात्र एक ग्राम यूरेनियम से उतनी ही बिजली बनाई जा सकती है, जितनी तीन टन कोयले को जलाने से मिलती है।

यूरेनियम का फायदा सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी यह वरदान है। यूरेनियम से तैयार होने वाले रेडियोआइसोटोप की मदद से डॉक्टर इंसानी शरीर में छिपे ट्यूमर का बेहद सटीक पता लगा लेते हैं। इसके अलावा कैंसर जैसी घातक बीमारियों के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में न्यूक्लियर मेडिसिन अब जीवन रक्षक की भूमिका निभा रही है।

कृषि क्षेत्र में भी न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कमाल कर रही है। इसकी मदद से वैज्ञानिक म्यूटेशन ब्रीडिंग के जरिए ऐसी फसलें तैयार कर रहे हैं, जिनकी पैदावार सामान्य से कहीं ज्यादा होती है। वहीं दूसरी तरफ 'फूड इरेडिएशन' तकनीक के माध्यम से खाने-पीने की चीजों को बिना नुकसान पहुंचाए उनके भीतर मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म किया जाता है। इससे अनाज और डिब्बाबंद खानों की शेल्फ लाइफ काफी बढ़ जाती है और खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता।

भारत के लिए क्यों जरूरी है ये डील

देश की रफ्तार तेज हो रही है और उसी तेजी से फैक्ट्रियों से लेकर घरों तक में बिजली की मांग रिकॉर्ड तोड़ रही है। कोयले के सीमित भंडारों और प्रदूषण को देखते हुए भारत अब परमाणु ऊर्जा पर अपना फोकस बढ़ा रहा है। ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यह यूरेनियम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा और आने वाली पीढ़ियों को निर्बाध बिजली देने का सपना सच कर पाएगा।

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