इंटरनेट पर एक गलती और पहुंच सकते हैं जेल, जानें क्या है डॉक्सिंग क्राइम
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लोगों की निजी जानकारी इंटरनेट पर साझा होने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं की तस्वीरें, वीडियो, मोबाइल नंबर और कथित तौर पर उनके पते सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। आरोप है कि इसके बाद कई महिलाओं को गालियां दी गईं। रेप की धमकियां मिलीं और जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।
इस घटना ने एक बार फिर लोगों का ध्यान डॉक्सिंग (Doxxing) जैसे साइबर खतरे की ओर खींचा है।
डॉक्सिंग क्या होती है?
डॉक्सिंग का मतलब किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील जानकारी उसकी अनुमति के बिना इंटरनेट पर सार्वजनिक करना है। इसमें मोबाइल नंबर, घर का पता, ईमेल आईडी, कार्यस्थल की जानकारी, फोटो, बैंक से जुड़ी जानकारी या अन्य व्यक्तिगत विवरण शामिल हो सकते हैं।
ऐसा अक्सर किसी को डराने, बदनाम करने, मानसिक रूप से परेशान करने या उसके खिलाफ ऑनलाइन हमले को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है।
क्या भारत में डॉक्सिंग के लिए अलग कानून है?
फिलहाल भारत में डॉक्सिंग को अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने वाला कोई विशेष कानून नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो सकती।
यदि किसी की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जाता है तो पुलिस आईटी एक्ट 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सकती है। मामले की गंभीरता के अनुसार आरोपी को तीन साल या उससे अधिक की जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
आईटी एक्ट में कौन-कौन से प्रावधान हैं?
धारा 72A
यदि किसी व्यक्ति को सेवा या अनुबंध के दौरान मिली निजी जानकारी उसकी अनुमति के बिना सार्वजनिक की जाती है और ऐसा नुकसान पहुंचाने की मंशा से किया जाता है तो इस धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है।
इस अपराध में तीन साल तक की जेल, पांच लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।
धारा 66E
यह धारा निजता के उल्लंघन से जुड़ी है। यदि किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो उसकी सहमति के बिना ली जाती है या इंटरनेट पर साझा की जाती है तो यह धारा लागू हो सकती है।
इसमें तीन साल तक की जेल, दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।
धमकी देने पर कौन सी धारा लागू हो सकती है?
यदि लीक की गई जानकारी का उपयोग किसी व्यक्ति या उसके परिवार को डराने या धमकाने के लिए किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इस धारा में दो साल तक की जेल का प्रावधान है।