Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू पितृ पक्ष, घर जरूर लाएं ये 3 चीजें!

Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू पितृ पक्ष, घर जरूर लाएं ये 3 चीजें!

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए बेहद पवित्र माना गया है। इस दौरान किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और परिवार पर उनका असीम आशीर्वाद बना रहता है।

साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होने जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में केवल तर्पण करना ही नहीं, बल्कि कुछ खास मंगलकारी वस्तुओं को घर लाना भी अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इन चीजों के घर प्रवेश से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि कुंडली में मौजूद पितृदोष भी शांत होता है। आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के 16 दिनों में किन वस्तुओं को घर लाना सौभाग्य का कारक बनता है।

तांबे, कांसे और पीतल के बर्तन: तर्पण में लाएं काम, मिलेगी मानसिक शांति

पितृ पक्ष के दौरान धातु से बने विशिष्ट पात्रों की खरीदारी को शास्त्रों में विशेष महत्व दिया गया है। इस काल में तांबे, पीतल और कांसे के नए बर्तन घर लाना अति शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि पूर्वजों को तर्पण अर्पित करते समय हमेशा इन्हीं पवित्र धातुओं के पात्रों का इस्तेमाल करना चाहिए। तांबे या पीतल के लोटे से दिया गया जल सीधे पितरों की आत्मा को तृप्त करता है और साधक को जीवन में चल रहे कलह और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।

पावन गंगाजल: मोक्ष का मार्ग और घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश

सनातन परंपरा में गंगाजल को अमृत तुल्य माना गया है। यदि आपके घर में गंगाजल समाप्त हो गया है या कम है, तो पितृ पक्ष शुरू होते ही शुद्ध गंगाजल घर जरूर लाएं। तर्पण और पिंडदान के जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाने से पितरों को मोक्ष और सद्गति प्राप्त होती है। इसके अलावा, श्राद्ध पक्ष के दिनों में प्रतिदिन घर के हर कोने में गंगाजल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष समाप्त होते हैं, जिससे परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

काले तिल: पितृदोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि का अचूक उपाय

शास्त्रों के अनुसार, काले तिल के बिना पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म कभी पूर्ण नहीं माना जाता है। पितृ पक्ष में काले तिल खरीदकर घर लाना और नियमित पूजा व तर्पण में इनका प्रयोग करना अत्यंत फलदायी होता है। तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माने गए हैं, इसलिए इनका दान करने से जन्म-जन्मांतर के पितृदोष और शनि दोष शांत होते हैं। श्राद्ध के दौरान ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को काले तिल का दान करने से पितर तृप्त होकर वंश वृद्धि और दीर्घायु का वरदान देते हैं।