मैटरनिटी लीव के बाद छिनी नौकरी, लेकिन इस भारतीय महिला ने नहीं मानी हार; मुश्किलों को मात दे खड़ी की अपनी नई पहचान!

मैटरनिटी लीव के बाद छिनी नौकरी, लेकिन इस भारतीय महिला ने नहीं मानी हार; मुश्किलों को मात दे खड़ी की अपनी नई पहचान!

कामकाजी महिलाओं के लिए मां बनना जीवन का सबसे सुखद अहसास होता है, लेकिन कॉर्पोरेट जगत के कड़े और कभी-कभी असंवेदनशील रवैये के कारण कई महिलाओं के लिए यह उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन जाता है। ऐसी ही एक बेहद भावुक और हौसला देने वाली कहानी एक भारतीय महिला की सामने आई है, जिन्हें मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से लौटते ही कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया था। लेकिन उन्होंने इस झटके के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी खुद की एक नई राह चुनी और आज वह सफलता की नई इबारत लिख रही हैं।

मां बनने की खुशी के बीच करियर का सबसे बड़ा झटका

अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर कॉर्पोरेट सेक्टर में एक अच्छे पद पर काम कर रही इस महिला के जीवन में सब कुछ बेहतरीन चल रहा था। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी मैटरनिटी लीव पूरी की और दोबारा ऑफिस जॉइन करने की तैयारी की, कंपनी ने उन्हें यह कहकर नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया कि उनकी भूमिका की अब जरूरत नहीं है या उनकी जगह किसी और को रख लिया गया है।

यह झटका सिर्फ एक नौकरी जाने का नहीं था, बल्कि उस भरोसे और सालों की मेहनत के टूटने का था जो उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए की थी। मातृत्व के शुरुआती दिनों की मानसिक और शारीरिक थकान के बीच इस तरह नौकरी से निकाला जाना किसी भी महिला को डिप्रेशन में धकेलने के लिए काफी था।

आंसू पोछकर चुनी संघर्ष की राह: खुद का स्टार्टअप किया शुरू

कुछ दिनों की निराशा के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह खुद को एक 'बेबस मां' के रूप में नहीं बल्कि एक 'सशक्त उद्यमी' (Entrepreneur) के रूप में स्थापित करेंगी। उन्होंने अपनी पुरानी विशेषज्ञता, स्किल्स और अनुभवों को समेटा और खुद का एक स्टार्टअप या फ्रीलांस कंसल्टेंसी बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

  • घर से शुरुआत: उन्होंने अपने बच्चे की देखभाल के साथ-साथ घर के एक छोटे से कोने से अपने नए काम की शुरुआत की।

  • समय का सही तालमेल: बिना किसी बाहरी मदद के, उन्होंने फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स (काम के लचीले घंटे) का फायदा उठाते हुए अपने मातृत्व और काम के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाना सीखा।

  • खुद की बॉस बनीं: आज वह किसी कंपनी के फैसलों की मोहताज नहीं हैं, बल्कि अपनी खुद की बॉस हैं और उनका यह छोटा सा प्रयास अब एक सफल बिजनेस का रूप ले चुका है।

"मेरी मातृत्व मेरी कमजोरी नहीं, मेरी सबसे बड़ी सुपरपावर है"

आज वह न केवल आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए अपनी कहानी साझा कर उन हजारों महिलाओं की आवाज बन चुकी हैं जो हर साल 'मैटरनिटी पेनल्टी' (मां बनने के कारण करियर में नुकसान) का शिकार होती हैं।

उनका युवाओं और महिलाओं के लिए संदेश: "जब मुझे नौकरी से निकाला गया, तो मुझे लगा कि मेरा करियर खत्म हो गया। लेकिन आज मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे उस कंपनी के फैसले पर हंसी आती है। मातृत्व आपको मल्टीटास्किंग और धैर्य सिखाता है, जो किसी भी बड़े बिजनेस को चलाने के लिए सबसे जरूरी गुण हैं। अगर कोई आपके लिए दरवाजे बंद करता है, तो खुद के लिए नया रास्ता बनाने से मत डरिए।"

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