अचानक बेहोश होना आम बात नहीं! डॉक्टर ने दी चेतावनी, इन 10 लक्षणों को देखा तो तुरंत भागें अस्पताल
चिकित्सीय भाषा में समझें तो बेहोशी (Syncope) मस्तिष्क में अपर्याप्त रक्त प्रवाह या ऑक्सीजन की अस्थाई कमी के कारण होने वाली चेतना की हानि है। जब हमारे दिमाग को जरूरत के मुताबिक खून या ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, तो शरीर अचानक अचेतन अवस्था में चला जाता है। हालांकि कभी-कभार होने वाली बेहोशी के पीछे अत्यधिक थकान, तनाव या लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) जैसे कारण होते हैं, लेकिन जब यह घटना बार-बार दोहराने लगे तो इसका सीधा संबंध दिल की धड़कन के अनियमित होने (Arrhythmia) या मस्तिष्क की नसों में रक्त प्रवाह की रुकावट से हो सकता है। डॉ. अपूर्वा शर्मा स्पष्ट करती हैं कि बार-बार बेहोश होने की घटनाओं को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी बड़े न्यूरोलॉजिकल या कार्डियक अरेस्ट जैसी आपातकालीन स्थिति का पूर्व संकेत हो सकती हैं।
रेड अलर्ट: बेहोशी के साथ दिखने वाले इन 10 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर
डॉ. शर्मा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को बेहोशी आने के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो बिना एक पल गंवाए न्यूरोलॉजिस्ट या कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए:
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बिना किसी ठोस या स्पष्ट कारण के बार-बार बेहोश हो जाना
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बिना किसी चेतावनी के अचानक और अस्पष्ट रूप से ब्लैकआउट होना
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बेहोशी के दौरान शरीर में झटके आना या ऐंठन होना
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होश में आने के बाद काफी देर तक भ्रम की स्थिति (Confusion) रहना
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बेहोश होकर उठने के बाद अत्यधिक और असामान्य थकान महसूस होना
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अचानक दिल की धड़कन का बहुत तेज होना या सीने में तेज दर्द होना
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बेहोशी की हालत में मूत्राशय (यूरिन) पर से नियंत्रण खो जाना
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जिम में वर्कआउट या भारी व्यायाम करते समय अचानक चक्कर खाकर गिरना
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अचानक और अप्रत्याशित रूप से संतुलन खोकर गिर जाना
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कुछ पलों के लिए शून्य में घूरने की प्रवृत्ति या अचानक याददाश्त चले जाना
ब्लैकआउट को नजरअंदाज करने का अंजाम: फ्रैक्चर से लेकर रोड एक्सीडेंट तक का खतरा
बार-बार होने वाली बेहोशी न सिर्फ मानसिक रूप से कष्टदायक होती है, बल्कि यह मरीज के जीवन के लिए भी बड़ा जोखिम खड़ी कर देती है। अचानक बेहोश होने से व्यक्ति कहीं भी गिर सकता है, जिससे सिर में गंभीर चोट, हड्डियों में फ्रैक्चर और गाड़ी चलाते समय जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं (Road Accidents) होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, जांच में देरी होने से शरीर के अंदर छिपी गंभीर बीमारी का समय पर निदान नहीं हो पाता। डॉक्टरों द्वारा इस समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए ब्लड प्रेशर की निरंतर मॉनिटरिंग, ईसीजी (ECG) और हृदय मूल्यांकन, ब्रेन स्कैन (MRI/CT Scan), दौरों का पता लगाने के लिए ईईजी (EEG) और विस्तृत ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। डॉ. शर्मा कहती हैं कि समस्या का जितनी जल्दी पता चल जाए, इलाज का परिणाम उतना ही बेहतर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि मिर्गी (Epilepsy) के कुछ गंभीर मामलों में, जहां दवाइयों के बाद भी दौरे अनियंत्रित रहते हैं, वहां आधुनिक 'डीप ब्रेन स्टिमुलेशन' (DBS) तकनीक की मदद से मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है।
फर्स्ट एड गाइड: अगर आपके सामने कोई अचानक बेहोश हो जाए तो तुरंत करें ये काम
आपातकालीन स्थिति में सही फर्स्ट एड (प्राथमिक चिकित्सा) की जानकारी होना किसी की जान बचा सकता है। डॉ. अपूर्वा शर्मा ने इसके लिए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस सुझाई हैं:
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सीधा लिटाएं: बेहोश हुए व्यक्ति को तुरंत जमीन पर सीधा पीठ के बल लिटा दें और उनके पैरों को थोड़ा ऊपर उठा दें, ताकि मस्तिष्क तक ब्लड सर्कुलेशन तेजी से हो सके।
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कपड़े ढीले करें: मरीज को सांस लेने में आसानी हो, इसके लिए उनके गले की टाई, शर्ट के ऊपरी बटन या किसी भी तरह के तंग कपड़ों को तुरंत ढीला कर दें।
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पानी या खाना न दें: जब तक व्यक्ति पूरी तरह होश में न आ जाए, तब तक उसके मुंह में पानी या खाना डालने की भूल कतई न करें। अचेत अवस्था में इससे सांस की नली चोक होने (दम घुटने) का सबसे बड़ा खतरा रहता है।
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लक्षणों पर रखें नजर: होश में आने के बाद भी अगर मरीज को सीने में दर्द, घबराहट या भ्रम की स्थिति बनी रहती है, तो उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाएं।