राम मंदिर चंदे पर अखिलेश यादव का अब तक का सबसे तीखा हमला, बीजेपी के अंदरूनी कलह का किया भंडाफोड़

राम मंदिर चंदे पर अखिलेश यादव का अब तक का सबसे तीखा हमला, बीजेपी के अंदरूनी कलह का किया भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण के चंदे में हुए कथित गबन और घोटाले के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सोमवार को एक बार फिर बेहद आक्रामक और तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि इस चंदा चोरी कांड ने केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के बीच चल रहे गंभीर अंदरूनी मतभेदों और आपसी खींचतान को पूरी तरह से चौराहे पर लाकर उजागर कर दिया है।

सपा ने साधा निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भगवा दल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और भक्ति से जुड़े इस बेहद संवेदनशील विवाद को सुलझाने के बजाय अपनी आंतरिक प्रतिद्वंद्विता और आपसी कलह को लेकर अधिक चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर कोई भी एक्शन लेने से पहले ही आनन-फानन में विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दे दिया। अखिलेश के मुताबिक, यह जल्दबाजी साफ दर्शाती है कि दिल्ली और लखनऊ के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

सत्ता के लिए आपस में संघर्ष कर रही 'डबल इंजन' की सरकार

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने 'डबल इंजन सरकार' के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और केंद्र में बनी सो-कॉल्ड दोहरी इंजन वाली सरकार आपसी सहयोग और तालमेल से काम नहीं कर रही है, बल्कि वे दोनों सत्ता के लिए आपस में ही संघर्ष कर रही हैं। लखनऊ और दिल्ली के बीच वर्चस्व की एक अदृश्य जंग चल रही है। इन नेताओं के मन में न तो जनता की आस्था के प्रति कोई सम्मान है और न ही भक्ति का कोई मोल है। यह सीधे तौर पर लोगों की अटूट धार्मिक भावनाओं के साथ किया जा रहा एक बड़ा खिलवाड़ है।

सपा सुप्रीमो ने तकनीकी पेंच फंसाते हुए आगे कहा कि अगर यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI) या आयकर विभाग (Income Tax) के दायरे का होता, तो इसकी जांच सीधे दिल्ली से ही तय होती। लेकिन दिल्ली के कुछ भी कदम उठाने से पहले ही लखनऊ ने इस हाई-प्रोफाइल जांच को अपने हाथ में ले लिया। यह पूरी स्थिति और कुछ नहीं बल्कि केवल और केवल बीजेपी के भीतर मचे शीर्ष सत्ता संघर्ष का सीधा नतीजा है।

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर अखिलेश की नजर, लोकसभा के नतीजों से बढ़े हौसले

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम मंदिर चंदा चोरी के इस संवेदनशील मामले को लेकर लगातार भाजपा को घेर रहे हैं, जिसका सीधा मकसद अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर इस बड़े अवसर का राजनीतिक लाभ उठाना है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही राज्य की सत्ता से बाहर चल रही है। हालांकि, हाल ही में संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की कुल 80 संसदीय सीटों में से रिकॉर्ड 37 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी के हौसले बुलंद हैं और वह 2027 में पूर्ण बहुमत के साथ राज्य की सत्ता में वापसी की बड़ी उम्मीद कर रही है।

 

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