कोई वैक्सीन नहीं, इलाज भी मुश्किल; जानें कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस, अब तक ले चुका है 22 बच्चों की जान
गुजरात में इन दिनों चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) ने भीषण तबाही मचा रखी है, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इस खतरनाक और जानलेवा वायरस की चपेट में आने से अब तक कुल 22 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि राज्यभर में इसके 184 संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 35 मामलों की रिपोर्ट चांदीपुरा पॉजिटिव आई है, जबकि कई अन्य बच्चों की लैब टेस्ट रिपोर्ट आना अभी बाकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है और लगातार एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
सामान्य फ्लू जैसे दिखने वाले लक्षण हैं बेहद खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण आम सर्दी-जुकाम और फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण अक्सर लोग इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
यही लापरवाही बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती है। दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रभात भूषण ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक अत्यंत खतरनाक वायरस है जो सीधे तौर पर मानव मस्तिष्क (दिमाग) पर हमला करता है, और यदि समय पर उचित इलाज न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है।
बच्चे में ऐसे कुछ नजर आएं तो सावधान हो जाएं
यह वायरस मुख्य रूप से 9 महीने से लेकर 14 साल तक की उम्र के बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। इसके सबसे सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना और बुखार का तेजी से ऊपर चढ़ना शामिल है।
इसके अलावा बच्चों में लगातार उल्टी, दस्त, तेज सिरदर्द और कई मामलों में होश खो बैठने या बेहोशी छाने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं। जब यह वायरस बच्चों पर अटैक करता है, तो उनमें इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) और फ्लू जैसे लक्षण उभर आते हैं। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई भी वैक्सीन या टीका उपलब्ध नहीं है, जो इसे और अधिक खतरनाक बनाता है।
कैसे फैलता है ये जानलेवा वायरस और क्या है बचाव?
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (बालू मक्खी), टिक (चिचड़ी) और मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। गुजरात में इस मक्खी के संक्रमण के कारण बच्चों के भीतर इंसेफेलाइटिस के गंभीर लक्षण पाए गए हैं। चूंकि यह बीमारी मक्खियों और मच्छरों के जरिए तेजी से फैलती है, इसलिए बच्चों को इनके काटने से बचाना सबसे बड़ा बचाव है। घरों के आसपास साफ-सफाई रखना, पानी जमा न होने देना और बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने से इस संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।