सांप से भी ज्यादा जहरीले होते हैं ये 5 तरह के लोग! चाणक्य ने कहा- तरक्की और सुकून चाहिए तो आज ही बना लें दूरी
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में सचेत करते हुए 5 ऐसे लोगों का उल्लेख किया है, जो किसी भी सीधे-साधे इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर सकते हैं। खुशहाल जिंदगी के लिए चाणक्य इन पांच लोगों से तुरंत दूरी बनाने की सलाह देते हैं-
1. दूसरों की पीठ पीछे थूकने वाले (चुगलखोर लोग)
कुछ लोगों की फितरत ही ऐसी होती है कि वे जब भी आपके साथ बैठेंगे, तो किसी तीसरे व्यक्ति की आलोचना या बुराई करना शुरू कर देंगे। ऐसे लोग दूसरों के गुप्त राज कभी अपने तक नहीं रख पाते और समाज में अफवाहें फैलाने में माहिर होते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, जो व्यक्ति आपके सामने किसी और की बुराई कर सकता है, वह निश्चित रूप से दूसरों के सामने जाकर आपकी पीठ पीछे भी आपकी धज्जियां उड़ाएगा। ऐसे दोमुंहे लोगों पर भरोसा करना खुद को कुएं में धकेलने जैसा है, इसलिए इनसे तुरंत दूर हो जाना चाहिए।
2. मतलब के यार (सिर्फ अपने फायदे के लिए नज़दीकी बढ़ाने वाले)
आज की दुनिया में मौकापरस्त लोगों की कोई कमी नहीं है, जो सिर्फ और सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाते हैं। जब तक उन्हें आपसे कोई काम या जरूरत होती है, वे दिन में दस बार आपको फोन करेंगे, आपकी तारीफों के पुल बांधेंगे और बेहद मीठी-मीठी बातें करेंगे। हालांकि, जैसे ही उनका काम निकल जाता है या जब आपको उनकी सच में जरूरत होती है, तो वे या तो अचानक गायब हो जाते हैं या कोई न कोई बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे स्वार्थी लोगों के साथ दोस्ती रखने से सिर्फ और सिर्फ आपका मानसिक और आर्थिक नुकसान होता है।
3. पल में तोला, पल में माशा (छोटी-छोटी बातों पर भड़कने वाले)
गुस्सा आना एक स्वाभाविक मानवीय भावना है, लेकिन ऐसे लोगों के साथ कोई भी रिश्ता निभाना बेहद मुश्किल और थका देने वाला होता है जो हर छोटी-छोटी बात पर अपना आपा खो देते हैं। बात-बात पर गुस्से से आग-बबूला होने वाले लोग अपने आसपास के पूरे माहौल में नकारात्मकता (Negativity) फैलाते हैं और दूसरों का मानसिक तनाव बढ़ाते हैं। ये लोग राई का पहाड़ बनाने और छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने में जरा भी समय नहीं लगाते। अपनी मानसिक शांति के लिए इनसे दूरी बनाए रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
4. खुद को भगवान समझने वाले (अहंकारी लोग)
अपनी काबिलियत और हुनर पर भरोसा करना आत्मविश्वास (Self-confidence) कहलाता है और यह बेहद अच्छी बात है। लेकिन यह मान लेना कि दुनिया में सिर्फ मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं और दूसरा कोई मेरे बराबर नहीं है, घोर अहंकार की निशानी है। अहंकारी लोग न तो कभी दूसरों की सही बात सुनते हैं और न ही किसी की राय का सम्मान करते हैं। घमंड की पट्टी आंखों पर बंध जाने के कारण वे सही और गलत के बीच का फर्क भूल जाते हैं। ऐसे लोगों के साथ लंबा रिश्ता आपकी खुद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
5. धन के भूखे (बेहद लालची और लालसा से भरे लोग)
जो लोग हमेशा आपके पद, प्रतिष्ठा, दौलत या पैसों पर नजर रखते हैं, वे कभी भी मानवीय रिश्तों की असली कीमत और सच्ची भावनाओं को नहीं समझ सकते। लालच के अंधे कुएं में डूबे ये लोग अपने जरा से फायदे के चक्कर में किसी भी मोड़ पर आपका सबसे बड़ा भरोसा तोड़ सकते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि जो लोग चंद रुपयों या स्वार्थ के लिए अपने नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों को भी दांव पर लगा देते हैं, उनके पास रुकना साक्षात विपत्ति को आमंत्रण देना है।