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उत्तर प्रदेश॥ लोकसभा इलेक्शन 2019 के परिणामों के बाद जिस तरह बसपा चीफ मायावती ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर करारा हमला करते हुए गठबंधन तोड़ा था। उसका जवाब सपा ने यूपी उपचुनाव में तीन सीटें हासिल करके दिया है।
उस वक्त मायावती के आरोपों पर खामोश रहकर अखिलेश यादव ने बता दिया कि साल 2022 में BJP का मुकाबला उनकी ही पार्टी करेगी और यदि 2022 में गठबंधन की आवश्यकता पड़ी तो वह भी सपा की शर्तों पर ही होगा।
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दरअसल बीती 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए थे उनमें से सपा ने 2017 के विधानसभा इलेक्शन में सिर्फ रामपुर की सीट ही जीती थी। लेकिन उपचुनाव में सपा ने न केवल रामपुर सीट बचाई बल्कि भाजपा से बाराबंकी की जैदपुर सीट और बसपा का मजबूत किला कहे जाने वाली जलालपुर सीट को भी छीन लिया।
उपचुनाव में भाजपा को 8 और एसपी को 3 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इतना ही नहीं सपा 4 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। यदि बात करें बीएसपी की तो वह एक भी सीट नहीं जीत सकी और केवल अलीगढ़ की इगलास और जलालपुर सीट पर ही दूसरे नंबर पर आ सकी।
आपको बता दें कि लोकसभा इलेक्शन 2019 के नतीजों के बाद सपा-बसपा गठबंधन को मनमुताबिक सीटें न मिलने पर मायावती ने गठबंधन तोड़ा था। मायावती ने अखिलेश यादव पर तीखा वार करते हुए कहा था कि उनकी अपने परंपरागत यादव वोट पर ही पकड़ कमजोर हो गई है।
उन्होंने बताया था कि अखिलेश ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारने का भी विरोध किया। इन आरोपों के बावजूद उस वक्त अखिलेश ने मायावती के विरूद्ध एक बयान भी नहीं दिया और वह खामोश रहे। लेकिन अब उपचुनाव के नतीजें यह साबित कर रहे हैं कि उस वक्त यदि सपा-बसपा का गठबंधन न होता तो मायावती 10 सीटें भी नहीं जीत पाती।