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प्रिह विहियर मंदिर, जो कंबोडिया के उत्तर में स्थित है, अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण विश्वभर में जाना जाता है। यह मंदिर प्राचीन खमेर वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल भी है। लेकिन इसके अलावा, यह मंदिर कंबोडिया और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का मुख्य कारण भी रहा है।

यह विवाद 20वीं सदी की शुरुआत से चल रहा है, जब फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन ने सीमा रेखा निर्धारित की थी। दोनों देशों के बीच इस मंदिर का नियंत्रण लेकर कई बार तनातनी और झड़पें हुई हैं। 21वीं सदी में भी इस क्षेत्र में सैन्य टकराव देखने को मिले, जिससे दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा।

प्रिह विहियर मंदिर की संरचना पर्वत की चोटी पर बनी है, जिससे इसकी रक्षा प्राकृतिक रूप से मजबूत होती है। मंदिर की खूबसूरत नक्काशी और प्राचीन मूर्तियां इसकी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती हैं।

फोटो में आप देख सकते हैं कि कैसे यह मंदिर प्रकृति के बीच शांति से खड़ा है, लेकिन इतिहास में यह जगह संघर्ष का मैदान रही है। दोनों देशों ने इस मंदिर को अपनी राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा माना है, इसलिए विवाद लगातार जारी रहा।

यह मंदिर न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति और सीमाओं के निर्धारण में भी अहम भूमिका निभाता है। इस वजह से प्रिह विहियर मंदिर आज भी कंबोडिया-थाईलैंड विवाद का एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

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