सिर्फ इस एक वजह से पढ़ाई छोड़ रही हैं बिहार की 27% लड़कियां, सर्वे के इन आंकड़ों ने खोल दी पोल
बिहार में परिवहन सुविधाओं की कमी, महंगे किराए और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं महिलाओं के विकास में बड़ी बाधा बन रही हैं। हाल ही में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राज्य की 27 प्रतिशत महिलाएं सिर्फ इन्हीं वजहों से अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं।
इसके अलावा, परिवहन पर होने वाले अत्यधिक खर्च के कारण कई महिलाएं अपनी छोटी-मोटी नौकरियां भी छोड़ने लगी हैं, क्योंकि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ आने-जाने के किराए में ही खर्च हो जाता है।
अध्ययन के मुख्य आंकड़े और महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें
इसी साल फरवरी से जून के बीच राज्य के सभी जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब पांच लाख महिलाओं पर यह सर्वे किया गया था। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षा की भावना और समय की पाबंदियों के चलते पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आने-जाने के किराए पर सालाना 18,800 रुपये अधिक खर्च करने पड़ते हैं। सार्वजनिक परिवहन के सुरक्षित साधनों के अभाव में महिलाओं को महंगे निजी वाहनों, टैक्सियों या रिजर्व ऑटो का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनके पारिवारिक बजट पर भारी बोझ पड़ता है। यही वजह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कुल आवाजाही 37 फीसदी कम होती है, जिसमें से 82 फीसदी यात्राएं काम या जरूरी कामकाज के लिए होती हैं।
पिंक बस सेवा से मिली राहत, सुरक्षा और सफर बना आसान
अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, जिन छह प्रमुख शहरों—पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा में पिंक बस सेवा शुरू की गई है, वहां महिलाओं ने खुद को काफी हद तक सुरक्षित महसूस किया है। इन बसों का किराया किफायती होने के कारण महिलाओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता और इन शहरों में लगभग 5 फीसदी महिलाओं का सफर को लेकर डर कम हुआ है। हालांकि, परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अभी भी बहुत कम है और सामाजिक मान्यताओं के कारण ऑटो या टैक्सी चलाने के क्षेत्र में महिलाओं को आगे आने में अड़चनें आ रही हैं, हालांकि अब धीरे-धीरे बदलाव भी दिखने लगा है।
सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा एक बड़ी चुनौती
सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि यात्रा के दौरान हर चौथे व्यक्ति द्वारा महिलाओं के उत्पीड़न या असहज करने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, जिससे महिलाओं में डर का माहौल बना रहता है। मुजफ्फरपुर की महिलाओं ने इस मामले में खुद को अधिक असहज महसूस किया है। अध्ययनकर्ता सोनल जेटली का कहना है कि परिवहन सुविधाओं की कमी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना गंभीर समस्या है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है ताकि राज्य की बेटियां और महिलाएं बिना किसी डर के अपनी शिक्षा और करियर को आगे बढ़ा सकें।