JSSC-CGL पेपर लीक मामले में कार्रवाई: मास्टरमाइंड आरोपी राजन कुमार दबोचा गया, परीक्षाओं में मचा हड़कंप!

JSSC-CGL पेपर लीक मामले में कार्रवाई: मास्टरमाइंड आरोपी राजन कुमार दबोचा गया, परीक्षाओं में मचा हड़कंप!

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तर प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) के पेपर लीक मामले में झारखंड पुलिस की सीआईडी (CID) विंग को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस बहुचर्चित और राज्यभर के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक कांड के बाद से लगातार फरार चल रहे एक मुख्य आरोपी और सॉल्वर गैंग के अहम मोहरे राजन कुमार को सीआईडी की विशेष टीम ने बिहार की राजधानी पटना से धर दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से परीक्षा माफियाओं और उनके राजनीतिक तथा प्रशासनिक संरक्षकों में भारी हड़कंप मच गया है। झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेरने वाले इस कुख्यात सिंडिकेट की परतें अब तेजी से उधड़ने लगी हैं, और सीआईडी की पूछताछ में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या था JSSC-CGL पेपर लीक कांड और कैसे हिला था पूरा झारखंड?

कुछ महीने पहले आयोजित हुई JSSC-CGL की यह परीक्षा झारखंड के सबसे बड़े सरकारी भर्ती इम्तिहानों में से एक थी, जिसमें राज्यभर से लाखों की संख्या में परीक्षार्थियों ने अपना भविष्य आजमाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन परीक्षा के दिन या उससे ठीक पहले प्रश्न पत्र (Question Paper) सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से लीक हो जाने के कारण पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था। सड़कों पर उतरे छात्रों ने भारी प्रदर्शन किया था और सरकार तथा आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीधे सीआईडी को सौंप दी थी। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस नापाक साजिश के पीछे कोई छोटा-छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय संगठित सॉल्वर सिंडिकेट काम कर रहा था, जो मोटी रकम लेकर युवाओं के भविष्य का सौदा करता था।

सीआईडी का गुप्त ऑपरेशन और पटना से आरोपी राजन कुमार की गिरफ्तारी

फरार आरोपियों की तलाश में जुटी सीआईडी की विशेष अनुसंधान टीम (SIT) को तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों के जरिए यह सटीक इनपुट मिला था कि इस पूरे लीक कांड का एक मुख्य मास्टरमाइंड या परीक्षा सामग्री का खरीद-फरोख्त करने वाला संदिग्ध राजन कुमार इन दिनों बिहार की राजधानी पटना या उसके आसपास के इलाकों में छिपा हुआ है। इस सुराग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक स्पेशल टीम का गठन किया और पटना के लिए रवाना हो गए। पटना पुलिस के सहयोग से एक गुप्त और अचूक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए सीआईडी की टीम ने आरोपी राजन कुमार को उसके ठिकाने से दबोच लिया। गिरफ्तारी के वक्त वह बचने की फिराक में था, लेकिन मुस्तैद टीम ने उसे भागने का कोई मौका नहीं दिया। उसके पास से कई डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

सिंडिकेट के अन्य चेहरों और पैसों के लेनदेन का हो सकता है बड़ा खुलासा

सीआईडी की गिरफ्त में आए आरोपी राजन कुमार से फिलहाल गुप्त स्थान पर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पेपर लीक के तार झारखंड के किन-किन बड़े अधिकारियों, कोचिंग संचालकों या राजनेताओं से जुड़े हुए हैं। परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र कहां प्रिंट हुआ था, वहां से उसे किसने लीक किया और किन-किन अभ्यर्थियों को पैसे लेकर वह पेपर पहले ही मुहैया कराया गया था, इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए सीआईडी इस कड़ी से कड़ी जोड़ने में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी द्वारा कुछ बेहद महत्वपूर्ण नाम उगले जाने की चर्चा है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में झारखंड और बिहार में कुछ और जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा सकती है और कई अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

युवाओं के गुस्से और न्याय की आस के बीच प्रशासनिक सख्ती का संदेश

JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद से ही झारखंड के लाखों युवा मानसिक तनाव और निराशा के दौर से गुजर रहे थे। उनकी लगातार यह मांग थी कि जब तक इस मामले के असली षड्यंत्रकारियों और मास्टरमाइंडों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक व्यवस्था पर से युवाओं का भरोसा उठ जाएगा। सीआईडी द्वारा राजन कुमार की इस गिरफ्तारी को इस दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। इस बड़ी कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध में लिप्त अपराधियों का अंत आखिरकार जेल की सलाखें ही होती हैं।