Anant Singh on Bankipur Bypoll: नीतीश कुमार को जिस तरह हटाया गया, उससे बिहार की जनता बीजेपी से नाराज है; बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत पर बोले बाहुबली अनंत सिंह
बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Bypoll Result) के आए चौंकाने वाले परिणामों के बाद सियासी पारा अपने उफान पर है। इस चुनाव में एनडीए के सबसे सुरक्षित गढ़ में बीजेपी की करारी हार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की ऐतिहासिक जीत ने सभी राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है। इस बीच, मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) ने इस चुनावी नतीजे और बिहार के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर बड़ा और बेबाक बयान दिया है, जिससे सूबे की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है।
नीतीश कुमार को हटाने के तरीके से जनता में गहरी नाराजगी
मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे कोई इत्तेफाक नहीं हैं, बल्कि यह बिहार की जनता के उस गुस्से का इजहार है जो वे लंबे समय से दबाए बैठी थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में राजनीतिक घटनाक्रम के तहत जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को सत्ता से हटाया गया या साइडलाइन करने की कोशिश की गई, उससे बिहार के आम मतदाताओं और खासकर उनके समर्थकों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति गहरी नाराजगी है। जनता ने बैलेट के जरिए इसी नाराजगी और बगावत का करारा जवाब दिया है।
प्रशांत किशोर की जीत पर क्या बोले अनंत सिंह?
बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर के उम्मीदवार की धमाकेदार जीत को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि जनता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों के खोखले दावों से ऊब चुकी है और एक नया विकल्प तलाश रही है। प्रशांत किशोर ने जमीन पर उतरकर जिस तरह से युवाओं, महिलाओं और बदलाव चाहने वाले वर्ग को जोड़ा, उसका सीधा फायदा उन्हें मिला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बांकीपुर का यह परिणाम इस बात का साफ संदेश है कि बिहार की जनता अब सिर्फ हवा-हवाई वादों पर नहीं, बल्कि जमीनी काम और बदलाव पर भरोसा कर रही है।
एनडीए के भीतर बढ़ सकती है सियासी सरगर्मी
अनंत सिंह के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या बांकीपुर के इन नतीजों के बाद एनडीए के भीतर अंदरूनी कलह और अधिक सतह पर आएगी। बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों को लेकर दिए जा रहे इन बयानों ने आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में बिहार की सियासत पर साफ देखने को मिलेगा।