औरंगाबाद में खाकी को मिला तगड़ा धोखा: खुद को सीनियर IPS अधिकारी बताकर घंटों घुमाता रहा शातिर ठग
बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से ऐसा करारा तमाचा लगा है, जिसने राज्य के बड़े-बड़े अफसरों की नींद उड़ाकर रख दी है और सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला, फिल्मी स्क्रिप्ट को भी मात देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक शातिर और शातिर दिमाग ठग ने खुद को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा यानी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का एक बड़ा अधिकारी बताकर न केवल स्थानीय पुलिस को अपनी उंगलियों पर नचाया, बल्कि जिले के कई थानों के थानेदारों और पुलिस अधिकारियों को अपनी गाड़ी में घंटों तक बैठाकर शहर की सैर भी कराता रहा। जब तक असली पुलिस और खुफिया तंत्र को यह समझ में आता कि उनके साथ एक बहुत बड़ा खेल हो चुका है, तब तक वह फर्जी आईपीएस अधिकारी अपनी चालाकी के बल पर खाकी वर्दी के रक्षक बने लोगों को बेवकूफ बनाकर पूरी महफिल लूट चुका था। इस घटना के सामने आने के बाद औरंगाबाद पुलिस मुख्यालय से लेकर पटना तक के गलियारों में भूचाल आ गया है, क्योंकि जिस विभाग का काम अपराधियों और ठगों को सलाखों के पीछे भेजना होता है, उसी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एक फर्जी शख्स के झांसे में आकर उसके सामने हाथ बांधे खड़े नजर आए। इस शर्मनाक वाकये ने कानून के रखवालों की सुरक्षा जांच और सतर्कता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर कैसे कोई अनजान शख्स आसानी से पुलिस महकमे के सर्वोच्च पद का रौब झाड़कर निकल भागा।
फिल्मी अंदाज में रची गई इस फर्जीवाड़े की पूरी दास्तान और थानेदारों को गाड़ी में घूमाने का वह सनसनीखेज खेल
इस शातिर ठग ने अपने इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए जो तरीका अपनाया, वह किसी भी शातिर मास्टरमाइंड को भी मात दे सकता है। वह शख्स बेहद शालीन कपड़ों में, वीआईपी कल्चर वाले अंदाज में और एक ऐसी चमचमाती गाड़ी में औरंगाबाद की सीमा में दाखिल हुआ जिसके आगे-पीछे पुलिस के बड़े अधिकारियों की तरह धौंस जमाने के इंतजाम नजर आ रहे थे। उसने स्थानीय पुलिस थानों के एसएचओ (SHO) और जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों को यह फोन करके अपनी मौजूदगी दर्ज कराई कि वह गृह मंत्रालय या पुलिस मुख्यालय से औचक निरीक्षण पर निकला हुआ एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी है। उसके बोलने का लहजा, रौबदार आवाज और अधिकारियों पर हुक्म चलाने का तरीका इतना सटीक था कि किसी को भी एक पल के लिए यह शक नहीं हुआ कि वह कोई बहरूपिया या ठग हो सकता है। इसके बाद उसने औरंगाबाद के कई थानों के थानेदारों को अपनी गाड़ी में बैठाया और शहर के अलग-अलग इलाकों का दौरा करते हुए कानून-व्यवस्था की समीक्षा के नाम पर उन्हें घंटों तक अपनी गाड़ी में घुमाता रहा। रास्ते में वह पुलिस अधिकारियों को निर्देश भी देता रहा और अपनी झूठी शानो-शौकत से उन्हें यह यकीन दिलाता रहा कि वह कोई बहुत बड़ा और पावरफुल अधिकारी है, जबकि पर्दे के पीछे उसका असली मकसद खाकी की ताकत का गलत इस्तेमाल करके अपने किसी अवैध काम को अंजाम देना या लोगों पर धौंस जमाना था।
कैसे हुआ इस फर्जी आईपीएस का भंडाफोड़ और पुलिस महकमे के भीतर मच गई खलबली
यह फर्जीवाड़ा तब बेनकाब हुआ जब उस कथित आईपीएस अधिकारी के हाव-भाव, उसके द्वारा पूछे जाने वाले अजीबोगरीब सवालों और उसके मूवमेंट को लेकर कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों और खुफिया यूनिट को हल्का सा संदेह हुआ। जब अधिकारियों ने उसके बारे में और अधिक गहराई से छानबीन करनी शुरू की और उसके द्वारा बताए गए परिचय पत्रों तथा गृह मंत्रालय के दस्तावेजों की असलियत खंगाली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि उस नाम का कोई भी सीनियर आईपीएस अधिकारी उस पद पर तैनात ही नहीं था। जैसे ही यह बात पक्की हुई कि जिसे वे लोग देश की सबसे बड़ी सेवा का अधिकारी समझकर सैल्यूट ठोक रहे थे और अपनी गाड़ी में आगे-आगे घुमा रहे थे, दरअसल वह एक शातिर ठग था, वैसे ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। थानेदारों और जिला प्रशासन के होश उड़ गए कि वे किस प्रकार अपनी नासमझी के चलते एक बहरूपिये के हाथों की कठपुतली बन गए थे। आनन-फानन में पुलिस ने पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया और उस फर्जी आईपीएस की धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन करके उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन तब तक वह शातिर ठग अपनी चालाकी का जाल समेटकर वहां से फरार हो चुका था। इस खुलासे के बाद औरंगाबाद पुलिस की कार्यशैली की हर तरफ थू-थू हो रही है और लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि अगर पुलिस खुद ही इतनी आसानी से ठगी का शिकार हो जाएगी, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी रह जाएगी।
खाकी की साख पर लगा बड़ा बट्टा और भविष्य के लिए सबक, क्या अब होगी लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई
औरंगाबाद की इस घटना ने पूरे बिहार पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है और इस बात पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है कि आखिर कैसे बिना किसी पुख्ता कागजात या प्रोटोकॉल की जांच किए किसी भी व्यक्ति को इतना बड़ा रसूख दे दिया गया। पुलिस नियमावली के अनुसार जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी किसी जिले के दौरे पर आता है, तो उसके लिए एक तयशुदा प्रोटोकॉल, सुरक्षा गार्ड और आधिकारिक सूचना का आदान-प्रदान होता है, लेकिन इस मामले में उन तमाम नियमों को ताक पर रख दिया गया। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते उन लापरवाह थानेदारों और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे फर्जी लोग भविष्य में और अधिक बड़े आपराधिक षड्यंत्रों को अंजाम दे सकते हैं। फिलहाल पुलिस के आला अधिकारी इस पूरे मामले की अंदरखाने जांच करवा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उस फर्जी आईपीएस के साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे जो इस रैकेट को चला रहे थे। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या उस शातिर ठग को पुलिस जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज पाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।