भागलपुर स्मार्ट सिटी का बड़ा खेल: 3.41 करोड़ के हाईटेक ई-टॉयलेट बने कबाड़, जनता की गाढ़ी कमाई पानी में

भागलपुर स्मार्ट सिटी का बड़ा खेल: 3.41 करोड़ के हाईटेक ई-टॉयलेट बने कबाड़, जनता की गाढ़ी कमाई पानी में

बिहार के भागलपुर शहर में आम जनता और राहगीरों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के दावे हवा होते नजर आ रहे हैं। भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा शहर में कुल 25 ई-टॉयलेट का निर्माण कराया गया था, जिस पर पानी की तरह करोड़ों रुपये बहाए गए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो चुकी है। देखरेख के आभाव में यह हाईटेक शौचालय अब शहर में महज 'शोभा की वस्तु' या यूं कहें कि कबाड़खाने में तब्दील होकर रह गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

घोटाले में घिरी एजेंसी और अनुबंध की अनदेखी

आधिकारिक जांच रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 3.41 करोड़ रुपये थी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी 'सर्वश्री रिलायबल एंटरप्राइजेज' नामक एजेंसी को दी गई थी, जो कि हाल ही में बड़े टेंडर घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में घिर चुकी है।

अनुबंध के नियमों के अनुसार, इस एजेंसी को न केवल ई-शौचालयों का निर्माण करना था, बल्कि अगले 5 वर्षों तक इनका सुचारू संचालन और रख-रखाव भी संभालना था। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होते ही एजेंसी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह पीछे हट गई। नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन की तरफ से जब भी समीक्षा बैठकें बुलाई गईं या नोटिस भेजे गए, तो इस एजेंसी का कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिससे पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई।

शहर के इन व्यस्त इलाकों में लगाए गए थे ई-टॉयलेट

भागलपुर के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 12 इलाकों को चिह्नित कर इन 25 यूनिट्स को स्थापित किया गया था। इनमें मुख्य रूप से शहर का मशहूर सैंडिस कंपाउंड मैदान, लाजपत पार्क, मुख्य बस डिपो क्षेत्र के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक और सार्वजनिक चौराहे शामिल हैं। इन स्थानों पर रोज हजारों लोगों का आना-जाना होता है, जिन्हें आज इन बंद पड़े शौचालयों के कारण भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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