आनंद किशोर से ED करेगी पूछताछ, इन 6 IAS ऑफिसर को भी समन; रिशु श्री टेंडर घोटाला केस में बड़ा एक्शन
बिहार के प्रशासनिक गलियारों से एक बहुत ही बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने राज्य के नौकरशाही महकमे की नींद उड़ा दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर के साथ-साथ राज्य के 6 अन्य वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को कड़ा समन जारी कर तलब किया है। वित्तीय गड़बड़ियों, आय से अधिक संपत्ति, और विभिन्न सरकारी योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताओं के तार जुड़ने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने यह सख्त कदम उठाया है। बिहार के प्रशासनिक तंत्र में शीर्ष पद पर बैठे अधिकारियों पर ईडी की इस सीधी कार्रवाई की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, वैसे ही पटना से लेकर दिल्ली तक के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में जबरदस्त खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल पूछताछ के दौरान कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे राज्य के कई बड़े विभागों की फाइलों से धूल हटना तय माना जा रहा है।
कौन हैं ईडी की रडार पर आए वरिष्ठ अधिकारी और क्या है पूरा मामला? जानिए किस बड़ी धांधली से जुड़े हैं तार
ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में आए आईएएस आनंद किशोर बिहार कैडर के बेहद प्रभावशाली और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे शिक्षा, नगर विकास और विभिन्न महत्वपूर्ण बोर्ड-निगमों में शीर्ष पदों की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके अलावा जिन 6 अन्य आईएएस अधिकारियों को समन जारी किया गया है, वे भी राज्य के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी (DM), सचिव और विभागाध्यक्ष (Secretary) जैसी प्रमुख भूमिकाएं निभा रहे हैं। ईडी के सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से राज्य की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं, टेंडर प्रक्रियाओं, निर्माण कार्यों और वित्तीय हस्तांतरणों में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और हेरफेर के सुराग मिले थे। प्राथमिक जांच और दस्तावेजों की गहन पड़ताल के बाद जब मनी ट्रेल के पुख्ता सबूत जांच एजेंसी के हाथ लगे, तो ईडी ने इन सभी अधिकारियों को निजी तौर पर क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होकर अपना स्पष्टीकरण और वित्तीय दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड दाखिल करने का हुक्म जारी कर दिया।
पूछताछ की तारीख तय होते ही पटना से दिल्ली तक हड़कंप: केंद्रीय एजेंसी की सख्त कार्रवाई से नौकरशाही में छाया सन्नाटा
समन जारी होने के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग तिथियों पर ईडी के आंचलिक दफ्तर में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों के बैंक खातों, अचल संपत्तियों के ब्योरे, परिजनों के नाम पर खरीदी गई जमीनों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। यदि पूछताछ के दौरान अधिकारी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं, तो ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत संपत्तियों की जब्ती और आगे की दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकती है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद बिहार के प्रशासनिक सचिवालय में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जब ईडी इन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ शुरू करेगी, तब बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों का तापमान और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।