भरत तिवारी मुठभेड़ में पहला एक्शन, STF जवान गिरफ्तार, जानें फेसबुक लाइव का पूरा सच
बिहार के भोजपुर जिले के बहुचर्चित भरत तिवारी पुलिस मुठभेड़ मामले में शुक्रवार को एक बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। आरा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए इस एनकाउंटर में शामिल एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान अक्षय के रूप में हुई है।
आरा के एसपी राज ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गहन जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही तेजी से की जा रही है। यह अहम कार्रवाई 17 जून को भोजपुर के बिलौती गांव में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस की गोली से हुई मौत के कुछ हफ्तों बाद हुई है।
फेसबुक लाइव वीडियो से गहराया था विवाद
इस पुलिस एनकाउंटर ने तब एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जब गोलीबारी से ठीक पहले का एक फेसबुक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उस वीडियो में कथित तौर पर दिख रहा था कि भरत तिवारी ने अपनी पिस्तौल पुलिसकर्मियों की तरफ फेंक कर आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था। परिवार का सीधा आरोप है कि निहत्थे होने के बावजूद भरत को जानबूझकर गोली मारी गई। वहीं, इसके उलट भोजपुर पुलिस का दावा था कि तिवारी ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और गोली भरत के पैर में लगी।
मां की भूख हड़ताल और परिवार की प्रमुख मांगें
भरत की मौत के बाद से ही उनका परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है। तिवारी की मां आशा देवी ने आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया था।
परिवार ने नामजद तौर पर जगदीशपुर के डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर थाने के एसएचओ राजेश कुमार मल्लकर, सब-इंस्पेक्टर अंकित आर्यन और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार (जो अब गिरफ्तार है) की तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठाई थी। इसके साथ ही, एनकाउंटर के बाद आक्रोशित ग्रामीणों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने और पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की भी सख्त मांग की गई है। परिवार ने प्रशासन से यह भी कहा है कि कोई भी जांच अधिकारी आने से पहले उन्हें पूर्व सूचना दे।
एफआईआर दर्ज और न्यायिक जांच के आदेश
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जन आक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार पहले ही न्यायिक जांच की घोषणा कर चुकी है। मृतक के परिवार की लिखित शिकायत पर बिहार पुलिस ने जगदीशपुर डीएसपी, शाहपुर एसएचओ और अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
आपको बता दें कि पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने अपने शुरुआती बयान में भरत भूषण तिवारी को 'मानसिक रूप से अस्थिर' बताया था। हालांकि, स्थानीय लोग और परिवार उन्हें एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं, जो प्रशासन के सामने स्थानीय मुद्दों को बेबाकी से उठाते थे। अब देखना यह है कि इस पहली गिरफ्तारी के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।