बिहार में सम्राट का हंटर मुजफ्फरपुर में जनता की फाइलें दबाकर बैठने वाले RO पर गिरी गाज
बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी दफ्तरों में 'लेट-लतीफी' को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) के कड़े तेवर का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मुजफ्फरपुर जिले में जनता की समस्याओं और शिकायतों से जुड़ी फाइलों को लंबे समय तक अटकाने और काम में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए मुजफ्फरपुर के संबंधित राजस्व अधिकारी (Revenue Officer - RO) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इस बड़े एक्शन से पूरे सूबे के प्रशासनिक अमले और राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
फाइलों को दबाकर बैठे रहने का लगा था गंभीर आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के इस अंचल कार्यालय में आम जनता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें, जिनमें जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), भूमि विवाद और विभिन्न जन-समस्याओं के आवेदन शामिल थे, महीनों से बिना किसी ठोस वजह के लंबित पड़े थे। जनता लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रही थी, लेकिन अधिकारी की तरफ से फाइलों का निपटारा करने में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन को जब इस बात की गुप्त शिकायतें और पुख्ता सबूत मिले, तो मामले की जांच कराई गई, जिसमें राजस्व अधिकारी को काम के प्रति पूरी तरह लापरवाह पाया गया।
'जनता की समस्याओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं' – सीएम की चेतावनी का असर
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा हाल ही में दिए गए उस सख्त अल्टीमेटम के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि जनता के काम में बाधा डालने वाले या फाइलों को बेवजह दबाकर बैठने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि आम नागरिकों की शिकायतों का निपटारा समय सीमा के भीतर होना चाहिए। मुजफ्फरपुर का यह निलंबन उसी चेतावनी का सीधा नतीजा माना जा रहा है, जिसने यह संदेश दे दिया है कि सरकार अब 'नो टॉलरेंस' (No Tolerance) की नीति पर चल रही है।
सस्पेंशन पीरियड के दौरान मुख्यालय से अटैच, विभागीय जांच शुरू
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सस्पेंशन की अवधि के दौरान संबंधित राजस्व अधिकारी को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध (Attach) कर दिया गया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी शुरू कर दी गई है। यदि जांच में भ्रष्टाचार या किसी अन्य वित्तीय अनियमितता की बात सामने आती है, तो उनके खिलाफ आगे और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी बाबूओं में मची खलबली, कामकाज में आई तेजी
मुजफ्फरपुर में हुए इस औचक और बड़े एक्शन के बाद जिले के अन्य अंचल कार्यालयों और सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खलबली मच गई है। सूत्रों की मानें तो इस कार्रवाई के डर से मुजफ्फरपुर और उसके आस-पास के जिलों में महीनों से धूल फांक रही फाइलों को आनन-फानन में निपटाने का काम शुरू हो गया है। सरकार के इस कड़े रुख की आम जनता जमकर तारीफ कर रही है, क्योंकि सालों से लटके कामों के अब जल्द पूरे होने की उम्मीद जाग गई है।